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माघ मेले सुपरकार: सतुआ बाबा की Porsche देख फटी रही आंखें, संतों ने उतारी आरती

Prayagraj Magh Mela: काशी के सतुआ बाबा (Satua Baba) ने 3 करोड़ की Porsche Taycan कार खरीदी है. माघ मेले में कार के पूजन का वीडियो वायरल हो रहा है. उनके पास लैंड रोवर डिफेंडर भी है.

Prayagraj Magh Mela Satua Baba Porsche Taycan Car Rituals in Sangam

Prayagraj Magh Mela Satua Baba Porsche Taycan Car Rituals in Sangam

Prayagraj Magh Mela: मोक्षदायिनी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर बसा माघ मेला आमतौर पर त्याग, तपस्या और सादगी के लिए जाना जाता है. कल्पवासी जहां फूस की झोपड़ियों में रहकर संयमित जीवन जीते हैं. वहीं इस बार मेले की फिजां में अलग ही चमक है. यह चमक है जर्मनी की मशहूर ऑटोमोबाइल कंपनी ‘पोर्श’ की उस सुपरकार की जो अब खाक चौक की शान बन गई है. काशी के चर्चित संत और पीठाधीश्वर जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास ‘सतुआ बाबा’ ने अपने काफिले में करीब 3 करोड़ रुपये की नई ‘पोर्श टायकन’ शामिल की है.

माघ मेले में सतुआ बाबा का शिविर (Satua Baba Prayagraj Camp) इन दिनों श्रद्धालुओं से ज्यादा ऑटोमोबाइल के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. आधुनिकता का ‘हाईटेक’ संगम लोगों में चर्चा को विषय बना हुआ है.

विधि-विधान से पूजन (Prayagraj Magh Mela Luxury)

सतुआ बाबा सादे वेश में भी ब्रांडेड चश्मे और शाही अंदाज के लिए मशहूर हैं. अब उन्होंने अपनी नई इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार का विधि-विधान से पूजन किया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब गेरुआ वस्त्रधारी संतों ने इस विदेशी मशीन पर फूल बरसाए और स्वास्तिक बनाया तो वहां मौजूद हर शख्स इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइल में कैद करने लगा. यह दृश्य आधुनिकता और सनातन परंपरा के एक अनोखे मिलन जैसा था.

लैंड रोवर के बाद अब पोर्श की बारी (Prayagraj Satua Baba Luxury Car)

सतुआ बाबा का लग्जरी कारों से प्रेम नया नहीं है. उनके गैराज में पहले से ही करोड़ों की कीमत वाली ‘लैंड रोवर डिफेंडर’ मौजूद है. अब पोर्श के आने से उनके काफिले को रफ्तार का नया साथी मिल गया है. पोर्श टायकन अपनी जबरदस्त स्पीड और इलेक्ट्रिक पावर के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

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युवा संतों के ‘आइकन’ (Prayagraj Sadhu Lifestyle)

सतुआ बाबा को सबसे युवा और स्टाइलिश महामंडलेश्वरों में गिना जाता है. उनका मानना है कि बदलते दौर में संत समाज भी आधुनिक साधनों से अछूता नहीं है. माघ मेले के धूल भरे रास्तों पर जब 3 करोड़ की यह कार फर्राटा भरती है, तो यह संदेश भी देती है कि भारतीय संत परंपरा में त्याग के साथ-साथ राजसी ठाठ-बाट का भी अपना एक अलग इतिहास रहा है. फिलहाल, यह कार पूरे मेले में चर्चा का विषय बनी हुई है.



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