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इस्तीके के बाद भी चंपत राय पावरफुल: ट्रस्ट के खजाने पर इनके करीबियों का कंट्रोल; चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मी अब हटे

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद भी वहां चंपत राय का रसूख बरकरार है. 1800 करोड़ रुपये के खातों और VIP पास पर उन्‍हीं के करीबियों का कंट्रोल है. अन्‍य आरोपी जांच टीमों के निशाने पर हैं.

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी के गंभीर आरोपों के बाद उपजा विवाद थम नहीं रहा. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्‍तीफे के बाद भी परिसर के भीतर उनका रसूख जस का तस बरकरार है. बताया जा रहा है कि ट्रस्ट से बाहर होने के बावजूद रामलला के दरबार में वीआईपी (VIP) पास बांटने से लेकर वित्तीय फैसलों तक में चंपत राय का ही सिक्का चल रहा है. मंदिर का करीब 1800 करोड़ रुपए का फंड जिन बैंक खातों में जमा है, उन्हें भी परोक्ष रूप से उनके बेहद करीबी लोग ही संभाल रहे हैं.

यह हैरान करने वाली स्थिति तब बनी हुई है, जब मंदिर में चढ़ावा चोरी के संगीन आरोपों के बाद चंपत राय बीते 26 जून को महासचिव पद से अपना इस्तीफा दे चुके हैं और 6 जुलाई को ट्रस्ट द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार भी किया जा चुका है. इस बीच, पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं. स्थानीय स्तर और गलियारों में यह माना जा रहा है कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चंपत राय को पूरी तरह बचाते हुए एक ‘सेफ एग्जिट’ (सुरक्षित निकास) दे दिया है.

चंपत राय: 35 साल का लगाव और परिसर न छोड़ने का सवाल

चंपत राय साल 1991 से ही अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं. राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दिनों से लेकर सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान केस की लंबी पैरवी तक, वे हमेशा हिंदू पक्ष का सबसे सक्रिय और प्रमुख चेहरा रहे. शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसले के बाद जब भव्य मंदिर निर्माण के लिए आधिकारिक ट्रस्ट का गठन हुआ, तो उन्हें बेहद ताकतवर माना जाने वाला ‘महासचिव’ का पद सौंपा गया. करीब साढ़े 3 दशकों तक अयोध्या की राम राजनीति के केंद्र बिंदु रहे चंपत राय ने चोरी के कलंक के बाद पद तो छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने अभी तक राम जन्मभूमि परिसर को नहीं छोड़ा है. अब भक्तों और आम जनता के बीच यह बड़ा सवाल कौंध रहा है कि जब वे किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, तो वे अभी भी राम जन्मभूमि परिसर के भीतर क्यों रह रहे हैं?

Champat Rai Resigns Former IFS Krishna Mohan Takes Charge Of Ram Mandir Trust

जानिए अयोध्या में कैसे हुए पर्दे के पीछे के ‘तीन बड़े खेल’


खेल 1. 1800 करोड़ की तिजोरी की चाबी चंपत के ‘दो खास’ के पास

बीती 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में मंदिर के बैंक खातों के संचालन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 3 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय वित्तीय कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, इंजीनियर जगदीश आफले और सीए (CA) चंदन राय शामिल हैं. लेकिन अंदर की बात यह है कि इन तीन नामों में से दो नाम सीधे तौर पर चंपत राय के इशारे पर काम करते हैं, क्योंकि इन्हें खुद चंपत राय की ही व्यक्तिगत सिफारिश पर ट्रस्ट के सहयोग के लिए रखा गया था. नियम के अनुसार, इन तीनों सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) के बिना बैंक से एक रुपया भी नहीं निकाला जा सकता. ऐसे में यह साफ है कि चंपत राय भले ही मुख्य पद पर न हों, लेकिन ट्रस्ट की तिजोरी और सभी बड़े वित्तीय फैसलों को प्रभावित करने की ताकत आज भी उनके पास सुरक्षित है.

खेल 2. राम मंदिर में VIP पास बांटने का ‘सिंडिकेट’ अभी भी एक्टिव

राम मंदिर में प्रतिदिन होने वाली मंगल आरती, श्रृंगार आरती और शयन आरती के लिए श्रद्धालुओं को बिल्कुल मुफ्त वीआईपी पास जारी किए जाते हैं. इसके लिए ट्रस्ट के चुनिंदा जिम्मेदार अधिकारियों को एक विशेष डिजिटल आईडी (Digital ID) प्रदान की जाती है. 26 जून को इस्तीफा देने वाले ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की डिजिटल आईडी को उसी दिन ब्लॉक कर दिया गया था. विशेष आमंत्रित सदस्य के पद से हटाए गए गोपाल नागरकोटे की आईडी भी 7 जुलाई की सुबह बंद कर दी गई. लेकिन चंपत राय की वीआईपी आईडी को 9 जुलाई तक एक्टिव रखा गया, जिसे अब जाकर बंद किया गया है.

चंपत राय के 18 सेवादारों का जलवा: चंपत राय की अनुशंसा पर भर्ती किए गए 18 सेवादारों की डिजिटल आईडी आज भी पूरी तरह चालू है और वे धड़ल्ले से मनमाने वीआईपी पास जारी कर रहे हैं. इन सेवादारों में सुबोध, मयंक चौहान, रास बिहारी, रजनीश, गजानन और उनका निजी ड्राइवर बबलू तिवारी शामिल हैं.

गोपाल नागरकोटे के 14 लोग भी मैदान में: पद से हटाए जा चुके गोपाल नागरकोटे की सिफारिश पर रखे गए 14 लोग भी पूरी तरह एक्टिव हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इन 14 लोगों की आईडी तब जारी की गई थी, जब खुद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने गोपाल की सिफारिश वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था.

Ram Mandir donation theft

खेल 3. डॉ. अनिल मिश्रा पर फूटा ठीकरा, मुख्य आरोपी टिन्नू यादव पर SIT मौन

6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में एसआईटी (SIT) की 9 पन्नों की जो प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश की गई, उसे देखकर कई विधिक सवाल खड़े हो रहे हैं. एसआईटी ने इस पूरे घोटाले का ठीकरा डॉ. अनिल मिश्रा के सिर पर फोड़ दिया है. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि डॉ. मिश्रा ने चढ़ावा चोरी रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को ठीक से लागू नहीं किया. 20 सितंबर 2024 और 6 फरवरी 2025 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के तत्कालीन मैनेजर गोविंद मिश्रा और डॉ. अनिल मिश्रा के हस्ताक्षरों से जो एसओपी बनी थी, उसे कभी धरातल पर उतारा ही नहीं गया. लेकिन एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का कतई उल्लेख नहीं किया कि मुख्य आरोपी रामशंकर यादव (टिन्नू यादव) को दानपात्रों की देखरेख के इतने असीमित अधिकार आखिर किसने और किसके कहने पर दिए थे?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की अब तक की कार्रवाई की टाइमलाइन

एसआईटी द्वारा की गई जांच का पूरा ब्योरा दिन-प्रतिदिन के आधार पर दर्ज है, जो इस प्रकार है:

15 जून: एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से प्रारंभिक जानकारी ली. इसके साथ ही 8 से 10 कर्मचारियों से करीब 6 घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई.

16 जून: जांच टीम ने चंपत राय और गोपाल राव से दोबारा चार-चार घंटे तक गहन सवाल-जवाब किए. ट्रस्ट के पिछले 11 महीनों के सभी वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला गया और चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों से लंबी पूछताछ हुई.

17 जून: जांच टीम ने बैंक के आला अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की. बैंक स्टेटमेंट और सभी वित्तीय रिकॉर्ड्स की बारिकी से पड़ताल की गई.

18 जून: एसआईटी की टीम पूरे 10 घंटे तक मंदिर परिसर में मौजूद रही. डॉ. अनिल मिश्रा से 4 घंटे और मुख्य आरोपी टिन्नू यादव से डेढ़ घंटे तक पूछताछ की गई और दोनों के बयानों को क्रॉस-चेक किया गया.

19 जून: चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव से अलग-अलग कमरों में आमने-सामने बिठाकर पूछताछ हुई. इसके साथ ही स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक और कैशियर से भी सवाल-जवाब किए गए.

20 जून: टीम ने सभी मुख्य आरोपियों और संदिग्धों के बैंक खातों की पूरी डिटेल इकट्ठा की और पुख्ता सबूत जुटाकर सारे दस्तावेजों के साथ लखनऊ के लिए रवाना हो गई.

23 जून: एसआईटी ने अपनी 20 पन्नों की शुरुआती विस्तृत रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी.

Ram Mandir Donation Scam

चढ़ावा चोरी के 8 मुख्य आरोपी: जिन पर है करोड़ों के गबन का आरोप

इस पूरे घोटाले में शामिल 8 मुख्य चेहरों और उनकी जिम्मेदारियों का विवरण:

क्र.सं. / आरोपी का नाम / मंदिर में जिम्मेदारी / मुख्य आरोप व बरामदगी
1 टिन्नू यादव दानपात्रों की देखरेख और सुरक्षा करोड़ों रुपए गबन किए, अयोध्या के आसपास बेनामी संपत्तियां खरीदीं.
2 अनुकल्प मिश्रा दानपात्र के रुपयों की गिनती में शामिल चढ़ावे की चोरी करके रुपयों को वाशरूम (बाथरूम) में छिपाता था.
3 लवकुश मिश्रा चढ़ावे की नकद काउंटिंग स्टाफ का सदस्य चोरी के पैसों से करोड़ों की संपत्तियां बनाईं, घर से 12 लाख रुपए नकद बरामद.
4 सुभाष चंद्र श्रीवास्तव कैश काउंटिंग स्टाफ के मुख्य प्रभारी निगरानी में घोर लापरवाही बरती और खुद भी दान की चोरी में शामिल रहा.
5 करुणेश पांडेय दान के रुपए काउंटिंग कक्ष तक लाना और गणना करना दान के पैसों से अयोध्या और आसपास के इलाकों में अवैध संपत्तियां खरीदीं.
6 मनीष यादव दानपात्रों में आने वाले चढ़ावे की गिनती करना मंदिर के चढ़ावे की सीधी चोरी की, घर पर छापेमारी में 36 लाख रुपए नकद मिले.
7 अविनाश शुक्ला दान के रुपयों को सुरक्षा कक्ष तक लाना और गिनना दान में आए रुपयों की चोरी करता था और अयोध्या के आसपास जमीनें खरीदीं.
8 रमाशंकर मिश्रा दानपात्रों को गणना कक्ष तक ले जाना और निगरानी अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर दान में आए रुपयों में भारी हेराफेरी की.


9 जुलाई 2026: रकम गिनने वाले 23 कर्मचारियों का एक साथ हुआ इस्तीफा

इस पूरे स्कैंडल के बीच, मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने गुरुवार को एक साथ अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. इन कर्मचारियों का कहना है कि चोरी की इस बड़ी घटना के बाद से दानपात्रों में 10 और 20 रुपए के छोटे नोटों की संख्या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिससे उनकी गिनती करने में अत्यधिक समय लग रहा है. कर्मचारियों ने बताया कि पहले जहां रोजाना 500 रुपए के बड़े नोटों की कम से कम 70-80 गड्डियां आसानी से बन जाती थीं, वहीं अब पूरे दिन की मशक्कत के बाद बमुश्किल 15 गड्डियां ही बन पा रही हैं.

इसके अलावा, कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि पहले यह काम दो अलग-अलग शिफ्टों में होता था, लेकिन अब सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक की केवल एक ही लंबी शिफ्ट कर दी गई है. काम के घंटे और मानसिक दबाव तो बढ़ गए हैं, लेकिन वेतन में ₹1 की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है. इस सामूहिक इस्तीफे के बाद अब बैंक और ट्रस्ट के पास दान की गिनती के लिए सिर्फ 13 गणना कर्मी ही शेष बचे हैं, जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है.

सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंचा चढ़ावा चोरी का मामला, 13 को सुनवाई

दूसरी ओर, राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह संवेदनशील मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट आगामी 13 जुलाई को इस मामले पर एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रहा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच इस संबंध में दायर की गई 3 अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. इन याचिकाओं में उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी जांच पर अविश्वास जताते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है. साथ ही, याचिकाओं में यह गुहार भी लगाई गई है कि भविष्य में राम मंदिर में आने वाले अरबों रुपए के महादान के पारदर्शी प्रबंधन और सुरक्षा की समीक्षा के लिए देश के शीर्ष वित्तीय एक्सपर्ट्स की एक स्वतंत्र कमेटी (Expert Committee) का गठन किया जाए. पूरे देश की निगाहें अब 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं.

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