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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, क्या फिर बढ़ेगी शंकराचार्य की मुश्किलें?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत दी है. हालांकि, आशुतोष महाराज ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

Shankaracharya Avimukteshwarananda

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है. हालांकि, इस फैसले को चुनौती देते हुए आशुतोष महाराज ने आज (गुरुवार) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

जानकारी के मुताबिक, आशुतोष महाराज ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की है. हाईकोर्ट ने 25 मार्च को आदेश दिया था कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम जमानत दी जा सकती है. इसके तहत आरोपियों को 50,000 रुपए के निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने पर जमानत दी गई, साथ ही जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित ना करने जैसी शर्तें भी तय की गईं.

हाईकोर्ट ने क्यों दी थी राहत?

हाईकोर्ट के आदेश में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत कुछ विसंगतियों को भी नोट किया गया. इनमें सबसे बड़ी बात यह थी कि शिकायत दर्ज करने में देरी हुई और कथित पीड़ितों के बयान समय और घटनास्थल को लेकर एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे. न्यायालय ने यह भी देखा कि प्रथम सूचना देने वाले व्यक्ति, जो पीड़ितों का अभिभावक होने का दावा कर रहे थे, उन्हें घटना की जानकारी 18 जनवरी 2026 को मिली, लेकिन पूजा और यज्ञ में व्यस्त होने के बहाने छह दिन तक पुलिस को सूचना नहीं दी.

न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने आदेश में मीडिया के माध्यम से किसी भी पक्ष को साक्षात्कार देने से भी रोक लगाई थी ताकि जांच और मुकदमे पर असर ना पड़े.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर आधारित है, जिसमें पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप शामिल हैं. फरवरी 2026 में विशेष पॉक्सो अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. इसके पहले, 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देते हुए जांच में सहयोग करने का आदेश भी दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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