UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीति अब तेज हो गई है. इसी को लेकर के सपा के मुखिया ने ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक की है. साथ ही लखनऊ में आगामी 5 अगस्त को जनेश्वर मिश्र की जयंती पर विशाल ब्राह्मण जनसभा करने जा रही है. इस बैठक के बाद से कई सवाल उठ खड़े हो रहे है कि आखिर बीजेपी ने ऐसी कौन की गलती की है जिसका फायदा उठाकर पीडीए की राजनीति करने वाली सपा अब ब्राह्मणों पर डोरे डालने की कोशिश कर रही है.
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपनी पार्टी में ब्राह्मण नेताओं को इकट्ठा कर रहे हैं और उनके साथ बैठकें कर रहे हैं. आमतौर पर चुनाव से पहले पार्टियां ऐसी बैठकें करती हैं, लेकिन सपा सुप्रीमो का ब्राह्मण नेताओं के साथ मीटिंग करना एक बहुत बड़ा और अलग कदम माना जा रहा है.
इसे सिर्फ एक सामान्य बैठक नहीं माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह माना जाता है कि ब्राह्मण वोटर पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ हैं. वे किसी भी हाल में बीजेपी को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. ऐसा कहा जाता है कि जैसे जनेऊ और उसे पहनने वाले को अलग नहीं किया जा सकता, वैसे ही यूपी में ब्राह्मणों और बीजेपी के राजनीतिक रिश्ते को अलग नहीं किया जा सकता. उत्तर प्रदेश में 2017 से लगातार बीजेपी की सरकार है और वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जो एक कट्टर हिंदूवादी नेता की है. तो ऐसे में क्या हो गया कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों पर डोरे डालने का मौका मिल गया.
बीजेपी से किन वजहों से नाराज है ब्राह्मण
- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुछ समय पहले पुलिस और प्रशासन ने दो बड़े धार्मिक गुरुओं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और बटुक महाराज के साथ जो व्यवहार किया था, उसे लेकर भी ब्राह्मण समाज में काफी गुस्सा है.
- ब्राह्मण समाज का एक और बड़ा आरोप यह है कि योगी सरकार में सरकारी अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में ब्राह्मणों के साथ भेदभाव हो रहा है.
- योगी सरकार उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय को बीजेपी के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरों के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन, इन दोनों ही नेताओं के बारे में कहा जाता है कि ये बीजेपी के नहीं हैं, बल्कि ‘समाजवादी पार्टी’ से बीजेपी में आए हैं.
मुलायम की सोच से अखिलेश का PDA
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की शुरुआत ही पिछड़ों (OBC), दलितों और अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों) को साथ लाने के लिए की गई थी. मुलायम सिंह यादव ने इसी सोच के साथ पार्टी बनाई थी ताकि राजनीति में उच्च जाति के दबदबे को कम किया जा सके. आज भी अखिलेश यादव PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर चुनाव लड़ते हैं, जिससे उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 सीटों की बड़ी जीत मिली.
पिछड़ों की राजनीति के बीच ब्राह्मणों को रिझाने की कोशिश
अब हर कोई हैरान है कि जो पार्टी हमेशा पिछड़ों और दलितों की बात करती थी, वह अचानक ब्राह्मणों को अपनी ओर करने में क्यों जुट गई है? अखिलेश यादव ने पहले ब्राह्मण नेताओं से मीटिंग की और अब वे 5 अगस्त को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में एक बहुत बड़ा ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ करने जा रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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