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क्या बीजेपी तलाश रही नए चेहरे? अमित शाह के गोरखपुर दौरे से उड़ी विधायकों की नींद, जानें किन पर गिरेगी गाज

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के आंतरिक सर्वे में गोरखपुर क्षेत्र के 15 से अधिक विधायकों की रिपोर्ट कार्ड खराब आई है, जिसके चलते कई सीटिंग विधायकों के टिकट कट सकते हैं.

UP BJP Internal Survey Shows Poor Report Card For Gorakhpur MLAs Bharat Express

UP BJP Internal Survey

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी कमर कस ली है. प्रदेश में सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी भाजपा इस बार प्रदर्शन को लेकर किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी द्वारा कराए गए कई दौर के आंतरिक सर्वे के बाद कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की अटकलें तेज हो गई हैं.

किन विधायकों के रिपोर्च कार्ड खराब?

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चुनाव की रणनीति तय करने के लिए राज्य में व्यापक आंतरिक सर्वे कराया है. ताजा सर्वे रिपोर्ट में खासतौर पर गोरखपुर क्षेत्र के सीटिंग विधायकों को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं.

गोरखपुर क्षेत्र के कुल 42 भाजपा विधायकों में से 15 से अधिक विधायकों का रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं पाया गया है. हालांकि, सर्वे में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जनता का फीडबैक अच्छा है, लेकिन विधायकों की व्यक्तिगत कार्यशैली, क्षेत्र में उपलब्धता और जनसंपर्क के स्तर पर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली है. पार्टी इस नाराजगी को दूर करने के लिए विवादित चेहरों की जगह नए और लोकप्रिय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का मन बना रही है.

अमित शाह के दौरों विधायकों की उड़ी नींद

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक भाजपा पूरे प्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने जा रही है. 13 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित इस अभियान के जरिए पार्टी डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचाएगी.

इसी अभियान के दौरान गृह मंत्री अमित शाह, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी.एल. संतोष जैसे बड़े दिग्गजों का गोरखपुर क्षेत्र में आगमन हो सकता है. आलाकमान के इन दौरों की खबरों ने मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है.

क्या है प्राथमिकता?

गोरखपुर क्षेत्र में 10 प्रशासनिक और 12 संगठनात्मक जिले आते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव (2022) में क्षेत्र की 62 में से 42 सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था. हालांकि, गोरखपुर-बस्ती मंडल के मुकाबले आजमगढ़, मऊ और बलिया जैसे इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था. ऐसे में नए चेहरों की तलाश और क्षेत्रीय संतुलन साधना हाईकमान की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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