Uttar Pradesh Politics: लखनऊ/रवि: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों (UP Assembly Election 2027) की बिसात अभी से बिछने लगी है. सूबे की सियासत में हमेशा से ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहने वाले मुस्लिम वोट बैंक को लेकर एक बड़ी हलचल सामने आई है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मुस्लिम समुदाय से सीधे अपील की है कि वे 2027 के चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (SP) के अलावा कोई ‘दूसरा विकल्प’ तलाशें.
मौलाना रज़वी के इस बयान ने यूपी के सियासी गलियारों में तपिश बढ़ा दी है, क्योंकि उन्होंने सपा के मौजूदा मुखिया अखिलेश यादव पर मुस्लिम मुद्दों से किनारा करने का सीधा आरोप लगाया है.
‘अखिलेश राज में बदल गया नजरिया’ (Maulana Shahabuddin Razvi On Akhilesh Yadav Uttar Pradesh)
लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश यादव की कार्यशैली की तुलना की. उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा, “2027 के यूपी विधानसभा चुनाव बहुत ज़्यादा अहमियत रखते हैं. जिसने 1990 से लेकर आज तक लगातार समाजवादी पार्टी को वोट दिया है और उसका समर्थन किया है, वे मौजूदा हालात पर गौर करें. जब से अखिलेश यादव ने पार्टी की कमान संभाली है, पार्टी का पूरा चेहरा, मोहरा और नजरिया बदल गया है. मुलायम सिंह मुस्लिम समुदाय के हमदर्द थे, लेकिन अखिलेश यादव नहीं हैं.”
अखिलेश की ‘चुप्पी’ पर सवाल
मौलाना रज़वी ने अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे अल्पसंख्यक समुदाय के संवेदनशील और अहम मुद्दों पर जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की शाही मस्जिद और कई दूसरे अहम मामलों पर पूरी तरह से चुप रहे हैं. इसलिए, मैं ज़ोर देकर कहता हूँ कि उन पर भरोसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है. समुदाय इस मामले पर गहराई से सोचे और ठीक से विचार करने के बाद, समाजवादी पार्टी के अलावा कोई दूसरा विकल्प तलाशे.”
बयान के बाद गरमाई सियासत (Uttar Pradesh Political News)
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. समाजवादी पार्टी ने जहां अपने ‘PDA’ फॉर्मूले का बचाव किया है, वहीं कांग्रेस ने खुद को अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सच्चा पैरोकार बताया है.
मौलाना के आरोपों पर पलटवार करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता शौर्या सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी सर्वसमाज को लेकर चलती है. उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी का वोट बैंक सिर्फ किसी जाति विशेष को लेकर निर्धारित नहीं है. हम संपूर्ण PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) को लेकर और हर जाति-वर्ग के मुद्दों व उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते हैं. लोकतंत्र में सभी धर्म के लोग स्वतंत्र हैं और जिसे चाहें उसे वोट कर सकते हैं.”
अल्पसंख्यकों के सम्मान और सुरक्षा के साथ कांग्रेस (Uttar Pradesh Big News)
मुस्लिम वोट बैंक की इस बहस के बीच कांग्रेस ने भी अपनी दावेदारी पेश की है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष हिंदवी ने कहा, “कांग्रेस पार्टी का हमेशा से यही स्टैंड रहा है कि अल्पसंख्यक समाज के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें. उन्हें समाज में पूरा सम्मान मिले और समानता के साथ उनके भी सभी काम हों. कांग्रेस हमेशा इसी नीति पर चलती है.”
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सभी राजनीतिक दल 2027 के महासमर के लिए अपनी-अपनी गोटियां सेट कर रहे हैं. मुलायम सिंह के दौर में सपा और मुस्लिम वोट बैंक का जो ‘अटूट’ समीकरण था, क्या अखिलेश यादव के नेतृत्व में उसमें दरार आ रही है? यह यूपी की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन गया है.
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