उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर चलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन सुभासपा (SBA) प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर (OP Rajbhar) ने इस बार समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (akhilesh yadav) पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला है. राजभर ने रविवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव को ‘राजा बाबू’ कहकर संबोधित किया और उन पर पिछड़ों, खासकर कुर्मी समाज के नेताओं का अपमान करने का बड़ा आरोप लगाया. राजभर ने दावा किया कि जो अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देते हैं, असल में उनके दिल में गैर-यादव पिछड़ों के लिए कोई सम्मान नहीं है.
‘सोनेलाल पटेल की जयंती पर दो शब्द भी नहीं निकले’
राजभर ने अपने पोस्ट की शुरुआत तंज भरे लहजे में ‘सुप्रभात’ कहकर की. उन्होंने लिखा, “राजा बाबू उर्फ अखिलेश यादव जी, आज मैं आपसे कुर्मी समाज के भाइयों के सम्मान और उनके नेताओं के तिरस्कार को लेकर बात करूंगा.” राजभर ने याद दिलाया कि दो जुलाई को सामाजिक न्याय के बड़े नेता डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती थी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन वंचितों और शोषितों के उत्थान में लगा दिया.
अखिलेश पर निशाना साधते हुए राजभर ने कहा, “मैंने आपका सोशल मीडिया हैंडल देखा, लेकिन आपने डॉ. सोनेलाल पटेल के लिए सम्मान या श्रद्धांजलि में दो शब्द भी लिखना जरूरी नहीं समझा. ऐसा लगता है कि आपके लिए नायक होने की पहली शर्त सिर्फ ‘यादव’ होना है. आप कुर्मी, दलित या गैर-यादव ओबीसी महापुरुषों को नायक ही नहीं मानते, बल्कि उनके प्रति आपके मन में घृणा का भाव है.”
‘पिता मुलायम सिंह की परंपरा ही याद रख लेते’
राजभर यहीं नहीं रुके, उन्होंने अखिलेश को राजनीतिक मर्यादा और शिष्टाचार का पाठ भी पढ़ाया. उन्होंने कहा कि डॉ. सोनेलाल पटेल की एक बेटी (अनुप्रिया पटेल) ने ठीक एक दिन पहले यानी एक जुलाई को अखिलेश के जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी थी, जो उनकी राजनीतिक शुचिता को दिखाता है. लेकिन अखिलेश अहंकार में डूबे हैं.
राजभर ने अखिलेश को घेरते हुए कहा, “माना कि सोनेलाल जी की एक बेटी से आपके राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन उनकी दूसरी बेटी (पल्लवी पटेल) तो आपकी ही सहयोगी हैं और आपकी पार्टी की विधायक हैं. उनकी पत्नी भी आपके साथ खड़ी हैं. कम से कम इस बात का तो लिहाज रखते. डॉ. सोनेलाल जी का सम्मान तो आपके पिता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव भी करते थे, कम से कम अपने पिता की बनाई परंपरा का ही निर्वहन कर लेते.”
ये भी पढ़ें: बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर, जनसुराज ने किया आधिकारिक ऐलान
‘यादववाद’ पर निशाना
कुर्मी समाज को एकजुट करने की कोशिश करते हुए राजभर ने सपा के पुराने दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा का भी जिक्र छेड़ दिया. उन्होंने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश जानता है कि सपा में कुर्मी नेताओं की क्या हालत होती है. बाबू बेनी प्रसाद वर्मा को भी इसी ‘यादववाद’ की वजह से एक समय पर समाजवादी पार्टी छोड़नी पड़ी थी. वे दोबारा पार्टी में तभी लौटे जब पूरी पार्टी को उनके आगे झुकना पड़ा था.
अंत में राजभर ने कुर्मी समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि ‘यादववादी पार्टी’ की इस कड़वी सच्चाई को जितनी जल्दी हो सके स्वीकार कर लें, क्योंकि इसी में उनका हित है. उन्होंने कहा कि बहुजनों और पिछड़ों के स्वाभिमान की लड़ाई ओमप्रकाश राजभर हमेशा लड़ता रहा है और आगे भी लड़ता रहेगा. राजभर का यह हमला साफ तौर पर यूपी की राजनीति में गैर-यादव ओबीसी वोटों को साधने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


