12 जुलाई 1854 को न्यूयॉर्क के वाटरविले में जन्मे जॉर्ज ईस्टमैन (George Eastman) ने फोटोग्राफी को आम आदमी की पहुंच में लाकर दुनिया बदल दी. आज जब हर किसी के पास स्मार्टफोन का हाई-डेफिनिशन कैमरा है, तब याद करना रोचक है कि एक समय रील वाले कैमरे ही तस्वीरें खींचने का एकमात्र साधन थे. कोडक कंपनी ने उसी युग को परिभाषित किया, और इसके पीछे जॉर्ज ईस्टमैन का दूरदर्शी विजन था.
साधारण शुरुआत से साम्राज्य तक
ईस्टमैन बचपन में ही संघर्ष से गुजरे. पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. बैंक क्लर्क के रूप में काम करते हुए उन्होंने फोटोग्राफी का शौक अपनाया, लेकिन उस समय की भारी-भरकम प्लेट कैमरा तकनीक उन्हें परेशान करती थी. 1870 के दशक के अंत में उन्होंने ड्राई प्लेट्स बनाने की प्रक्रिया विकसित की और 1881 में ईस्टमैन ड्राई प्लेट कंपनी की स्थापना की.
साल 1888 में उन्होंने ‘कोडक कैमरा’ से असली क्रांति लाई. स्लोगन था- ‘You press the button, we do the rest’ (आप बटन दबाइए, बाकी काम हम करेंगे). कैमरा पहले से 100 एक्सपोजर की रील से लदा हुआ बेचा जाता था. फोटो खींचने के बाद पूरा कैमरा कंपनी को वापस भेजना पड़ता था, जहां फिल्म प्रोसेस करके प्रिंट्स और नई रील भेज दी जाती थी. इसने फोटोग्राफी को पेशेवरों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचा दिया. 1892 में कंपनी का नाम ईस्टमैन कोडक कंपनी हो गया.
कोडक की वैश्विक विरासत
कोडक ने सिर्फ स्टिल फोटोग्राफी ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की नींव भी रखी. लचीली रील फिल्म ने सिनेमा को नई उड़ान दी.
चंद्रमा पर कोडक
नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज एल्ड्रिन ने 1969 में चंद्रमा की ऐतिहासिक तस्वीरें कोडक फिल्म पर ही उतारीं. स्पेस के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ईस्टाक्रोम फिल्म ने यह उपलब्धि संभव बनाई.
भारतीय सिनेमा में कोडक
भारत की पहली फुल-लेंथ साइलेंट फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ (1913, दादासाहेब फाल्के) कोडक रॉ फिल्म पर बनी थी. वहीं, 1937 में आई ‘किसान कन्या’ भारत की पहली स्वदेशी रंगीन फिल्म थी, जिसमें भी कोडक की तकनीक और फिल्म का महत्वपूर्ण योगदान था.
ईस्टमैन ने फोटोग्राफी को ‘पेंसिल जितना आसान’ बनाने का सपना देखा था, और वे इसमें सफल रहे. उनकी कंपनी ने न सिर्फ कैमरा और फिल्म बनाए, बल्कि फोटो फिनिशिंग का पूरा उद्योग खड़ा किया.
एक महान दानवीर
ईस्टमैन महान उद्यमी के साथ-साथ दानवीर भी थे. उन्होंने जीवनकाल में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, संगीत और कला के क्षेत्र में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा दान किए. रोचेस्टर विश्वविद्यालय, म्यूजिक स्कूल और कई अस्पतालों को उन्होंने भरपूर सहयोग दिया.
12 जुलाई को उनके जन्मदिन पर हम उन अग्रणी को याद करते हैं जिन्होंने एक साधारण शौक को वैश्विक क्रांति में बदल दिया. आज डिजिटल युग में कोडक का नाम भले ही बदल गया हो, लेकिन उनकी विरासत ‘हर पल को कैद करने की इच्छा’ आज भी जीवित है.
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-भारत एक्सप्रेस
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