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नेहरू से इंदिरा तक: जानिए कैसे 27 महीनों के गुप्त मिशन से सिक्किम को मिला भारत का ‘सुरक्षा छत्र’

16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना. चोग्याल की राजशाही को खत्म कर बिना किसी बड़े युद्ध के सिक्किम का भारत में विलय कराने के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसी RAW का 27 महीनों का ऐतिहासिक ऑपरेशन था.

How RAW Played A Key Role In Sikkim Merger With India In 1975

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Edited by Vaibhav Gupta

Sikkim Merger With India: 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक रूप से भारत का 22वां राज्य बना. एक समय का स्वतंत्र हिमालयी राजशाही वाला देश, जिसका अपना झंडा, राजा (चोग्याल) और सेना थी, बिना बड़े युद्ध के भारत का हिस्सा हो गया. इसके पीछे भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रॉ (Research and Analysis Wing) की निर्णायक भूमिका थी. यह कहानी रणनीति, राजनीतिक आंदोलन, राजशाही के आंतरिक विरोधाभास और सुरक्षा चिंताओं से जुड़ी है.

पृष्ठभूमि: संरक्षित राज्य से विलय तक

1947 में भारत की आजादी के बाद सिक्किम को अन्य रियासतों की तरह सीधे विलय नहीं किया गया. जवाहरलाल नेहरू ने इसे विशेष दर्जा दिया. 1950 की भारत-सिक्किम संधि के तहत सिक्किम भारत का संरक्षित राज्य (protectorate) बना. भारत ने इसकी रक्षा, विदेश नीति और संचार का नियंत्रण लिया, जबकि आंतरिक मामलों में चोग्याल की सत्ता बनी रही. नेहरू का दृष्टिकोण हिमालयी राज्यों (सिक्किम, भूटान, नेपाल) को स्वायत्त रखते हुए भारत के सुरक्षा छत्र में रखना था. उन्होंने लोकप्रिय विलय के दबाव को भी टाला.

1962 के भारत-चीन युद्ध और तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद सिक्किम की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई. सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) भारत के पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि से जोड़ता है. अगर सिक्किम चीन या किसी अन्य प्रभाव में चला जाता, तो पूर्वोत्तर खतरे में पड़ सकता था.

1963 में चोग्याल पलडेन थोंडुप नामग्याल सिंहासन पर बैठे. उनकी दूसरी पत्नी अमेरिकी होप कुक (Hope Cooke) थीं. होप कुक पर CIA एजेंट होने के आरोप लगे-उन्हें ‘ट्रोजन हॉर्स’ कहा गया, जो सिक्किम को भारत से दूर और तटस्थ बनाने की कोशिश कर रही थीं. उन्होंने दार्जिलिंग की वापसी जैसी मांगें उठाईं, जिससे भारतीय हलकों में चिंता बढ़ी. हालांकि पूर्व रॉ अधिकारी जी.बी.एस. सिद्धू और इंदिरा गांधी के सचिव पी.एन. धर जैसे लोगों ने लिखा कि ठोस CIA लिंक नहीं मिला, फिर भी ठंडे युद्ध के माहौल में यह शक बना रहा.

RAW की भूमिका: ऑपरेशन और रणनीति

1968 में इंदिरा गांधी ने रॉ की स्थापना की. 1971 के बांग्लादेश युद्ध में रॉ की सफलता के बाद, दिसंबर 1972 के आसपास इंदिरा गांधी ने रॉ के संस्थापक प्रमुख आर.एन. काओ से पूछा कि क्या आप सिक्किम के बारे में कुछ कर सकते हैं? हिमालयी राज्यों के आपसी तालमेल और चोग्याल की स्वतंत्रता की कोशिशों ने चिंता बढ़ाई थी.

रॉ ने लगभग 27 महीने का गुप्त ऑपरेशन चलाया (कुछ विवरणों में इसे ‘ऑपरेशन ट्वाइलाइट’ कहा जाता है).

राजनीतिक समर्थन

रॉ ने सिक्किम नेशनल कांग्रेस (SNC) के काजी ल्हेंडुप दोरजी और अन्य लोकतंत्र समर्थक नेताओं को वित्तीय, लॉजिस्टिक और रणनीतिक सहायता दी. जातीय नेपाली बहुसंख्यक आबादी (लगभग 75 प्रतिशत) राजशाही के भेदभाव (लेपचा-भुटिया अभिजात वर्ग के वर्चस्व) से असंतुष्ट थी. रॉ ने इस असंतोष को लोकतंत्र और भारत के साथ विलय के आंदोलन में बदलने में मदद की. जॉइंट एक्शन कमिटी (JAC) के आंदोलनों को समर्थन मिला.

चोग्याल को कमजोर करना

रॉ ने राजपरिवार और काजी परिवार की पुरानी प्रतिद्वंद्विता का इस्तेमाल किया. चोग्याल की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की कोशिशों (संयुक्त राष्ट्र सदस्यता आदि) को रोका गया.

अंतिम चरण / अप्रैल 1975

सिक्किम गार्ड्स को निहत्था किया गया. भारतीय सेना ने महल पर नियंत्रण लिया. एक गार्ड की मौत हुई, लेकिन बड़े पैमाने पर खून-खराबा नहीं हुआ. विधानसभा ने राजशाही खत्म करने और भारत में विलय का प्रस्ताव पास किया. जनमत संग्रह में लगभग 97.5 प्रतिशत वोट विलय के पक्ष में आए. 16 मई 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इसे मंजूरी दी.

पूर्व रॉ अधिकारी जी.बी.एस. सिद्धू की किताब Sikkim- Dawn of Democracy और निटिन गोखले की R.N. Kao: Gentleman Spymaster जैसी किताबों में इन विवरणों की पुष्टि हुई है. दिलचस्प बात यह है कि विदेश मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी नहीं थी.

नेहरू बनाम इंदिरा दृष्टिकोण

नेहरू ने 1950 की संधि से सिक्किम को सुरक्षित रखा, लेकिन पूर्ण विलय नहीं चाहा. इंदिरा गांधी ने सुरक्षा और लोकतंत्र के तर्क पर जोर दिया. चीन की धमकियां, होप कुक पर शक और चोग्याल की बढ़ती महत्वाकांक्षा ने फैसला तेज किया. रॉ ने बिना बड़े युद्ध के यह हासिल किया. यह भारत की खुफिया सफलता का उदाहरण माना जाता है.

विवाद और विरासत

कुछ आलोचक इसे ‘जबरन विलय’ या ‘साजिश’ कहते हैं. जनमत संग्रह पर दबाव के आरोप लगते हैं. लेकिन सिक्किम की अधिकांश आबादी राजशाही से मुक्ति और विकास चाहती थी. आज सिक्किम भारत का शांतिपूर्ण, पर्यटन-समृद्ध राज्य है. चीन ने लंबे समय तक विलय को नहीं माना, लेकिन बाद में हालात बदले.

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-भारत एक्सप्रेस



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