Bharat Express

Women’s Day Bhashan 2025: ‘नारी है शक्ति, वही ज्योति..’ महिला दिवस के लिए ये है सरल और दमदार स्पीच

International Women’s Day 2025: दुनियाभर में शनिवार, 8 मार्च का दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है. ये दिन महिलाओं के सम्मान में समर्पित है.

Women’s Day 8th March Speech: आज 8 मार्च 2025 को दुनियाभर में महिला दिवस मनाया जाएगा. इस अवसर पर स्‍कूल-कॉलेजों में कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. यहां पर हम आपके लिए लेकर आए हैं सरल और असरदार स्‍पीच, जो महिला दिवस पर आप लोगों के समक्ष दे सकते हैं:-

सुप्रभात!

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण, अभिभावक और मेरे प्यारे साथियों,
आज हम सब यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एकत्र हुए हैं. यह दिन महिलाओं के संघर्ष, उनकी उपलब्धियों और उनके समाज में योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है. साथ ही यह दिन हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम महिला सशक्तिकरण की दिशा में और अधिक ठोस कदम उठा सकते हैं.

8 मार्च का दिन केवल महिलाओं के लिए सम‍र्पित

महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है, और इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सम्मानित करना है. यह दिन महिलाओं की उन संघर्षों और संघर्षों को पहचानने का है, जिनका सामना वे हर दिन करती हैं. महिला दिवस के अवसर पर, हम यह न केवल मानते हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट हैं, बल्कि यह भी मानते हैं कि हमें समाज में उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए हर कदम उठाना होगा.

नारी शक्ति: जीवन का आधार

महिला, एक शब्द नहीं, बल्कि सृष्टि का मूल आधार है. वह न केवल जीवन की सृजनकर्ता है, बल्कि समाज की संरचनाओं का निर्माण करने वाली शक्ति भी है. भारतीय संस्कृति में नारी को ममता, शक्ति और त्याग की मूर्ति माना गया है.

शास्त्रों में कहा गया है –

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’

यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है. हमारे समाज में नारी की अहम भूमिका को कभी नकारा नहीं जा सकता.

महिलाओं की स्थिति और चुनौतियाँ

आज के समय में महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण काम किया है. वह राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, खेल और हर दूसरे क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं. बावजूद इसके, महिलाओं के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं. भारत में महिलाएं अभी भी कई जगहों पर घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा में असमानता और दहेज प्रथा जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं.

भारत में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में कम है. कार्यस्थलों पर महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलते हैं, और कई जगहों पर उन्हें उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जाता है. महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है.

महिला सशक्तिकरण: समाज की नींव

महिला सशक्तिकरण केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए एक आवश्यकता है. जब तक महिलाओं को उनके अधिकार, शिक्षा, रोजगार और स्वतंत्रता नहीं मिलते, तब तक समाज की नींव मजबूत नहीं हो सकती. महिला सशक्तिकरण का अर्थ है, महिलाओं को ऐसे अवसर देना जिससे वे अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी सकें.

हमारे समाज में महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन हमें और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है ताकि महिलाएं हर क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सकें.

अंत में, महिला दिवस का यह अवसर हमें न केवल महिलाओं की शक्ति और संघर्ष को पहचानने का है, बल्कि यह हमें यह याद दिलाता है कि हमें उन्हें समान अवसर और अधिकार देने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना होगा. हमें महिलाओं को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए उन्हें सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता देने की दिशा में हमेशा काम करना चाहिए.

साथ ही हमें यह समझना चाहिए कि जब तक महिलाएं समाज में समानता और सम्मान के साथ नहीं जीतीं, तब तक हमारा समाज पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो सकता. इसलिए, महिला दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन महिलाओं की शक्ति और उनके योगदान का सम्मान करने का दिन होना चाहिए.

यह भी पढ़िए: समाज में नशा-घरेलू हिंसा के विरुद्ध जागरुकता अभियान चला रहीं ये महिला कमांडोज, जुआ-सट्टा रोकने को भी मुखर



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read