इंडोनेशिया के पूर्वी इलाके में शनिवार तड़के आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 38 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं. भूकंप के बाद समुद्र में करीब 1 मीटर तक ऊंची सुनामी की लहरें देखी गईं, जिसके बाद जारी की गई सुनामी की चेतावनी को करीब तीन घंटे बाद वापस ले लिया गया.
नींद में ही ढह गई छतें
इंडोनेशिया की भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) के अनुसार, भूकंप तड़के 4:58 बजे आया, जिसका केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर गहराई में था. ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत के गवर्नर इमैनुएल मेल्कियाडेस लाका लेना ने बताया कि कई लोगों की मौत उस समय हुई जब वे सो रहे थे और अचानक मकानों का मलबा उन पर गिर गया.
तालिबुरा गांव की निवासी 51 वर्षीय नोना ने बताया, “झटका इतना तेज था कि पूरा घर हिल गया. हम 13 लोग घर में मौजूद थे और जान बचाने के लिए तुरंत बाहर की तरफ भागे.”
महत्वपूर्ण रास्ते बंद
आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि भूकंप का सबसे ज्यादा असर नागकेयो (Nagekeo) और मऊमेरे (Maumere) क्षेत्रों में देखा गया है. भूस्खलन के कारण कई अहम सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे राहत टीमों को भूकंप के मुख्य केंद्र के पास पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है. नागकेयो तक पहुंचने के लिए सड़कें बंद होने के बाद अब नावों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
वहीं, प्रभावित इलाकों में बिजली की सप्लाई ठप हो गई है और मोबाइल नेटवर्क पर भी बुरा असर पड़ा है. लगभग 2,000 से अधिक लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है.
रिंग ऑफ फायर बना भुकंप की वजह
इंडोनेशिया ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ (Pacific Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित है, जहां टेकटोनिक प्लेटों के टकराने की वजह से अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं होती रहती हैं. इससे पहले साल 1992 में भी इस इलाके में 7.5 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसने भारी तबाही मचाई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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