बांग्लादेश में हुई हिंसा। इनसेट में पीएम शेख हसीना।
Bangladesh Violence: कभी भारत का ही हिस्सा रहा बांग्लादेश (Bangladesh) अब कट्टर इस्लामी मुल्क बन चुका है. वहां बीते वर्ष आज ही के दिन (5 अगस्त, 2024 को) एक बड़ा सियासी उलटफेर हुआ था. प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका जान बचाकर भागना पड़ा. वे हवाई मार्ग से भारत पहुंचीं और यहां शरण मांगी.
हसीना के निकलते ही बांग्लादेश में हिंसा (Bangladesh Violence) का दौर शुरू हुआ, जिसका सबसे ज्यादा शिकार हिंदू समुदाय बना. तख्तापलट के बाद अवामी लीग के समर्थकों और हिंदुओं पर हमले तेज हो गए. एक साल बाद भी वहां स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. बांग्लादेश हिंदू-बुद्धिस्ट-क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से जून 2025 तक 2,442 सांप्रदायिक हमले हुए, जिनमें 59 हिंदुओं की हत्या, 33 रेप और 192 मंदिरों पर हमले शामिल हैं.
🚨Missing Alert #35
A Hindu girl named Dipti Sarkar has gone missing from Paikgacha, Khulna. A missing diary has been filed at the local police station. She has been facing ongoing harassment from Muslim boys for quite some time. https://t.co/znFMRglcAR pic.twitter.com/j4RlMAaEXL
— Voice of Bangladeshi Hindus 🇧🇩 (@VHindus71) August 3, 2025
हिंदू समुदाय अब सरकार से अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहा है. ढाका के हिंदू निवासी गोविंद चंद्र प्रामाणिक कहते हैं, “बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए हालात पूर्वी पाकिस्तान के दौर से भी बदतर हैं.” बांग्लादेश हिंदू-बुद्धिस्ट-क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी मणिंद्र कुमार नाथ कहते हैं, “हमारी मांग है कि बहन-बेटियों को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए. हिंदू, बौद्ध और अन्य अनुयायियों को सुरक्षा और न्याय मिले.”

तख्तापलट के बाद हिंसा: 15 दिन चला बड़ा खूनखराबा
बांग्लादेश (Bangladesh) में तख्तापलट के बाद 4 अगस्त से 20 अगस्त, 2024 तक के 15 दिन सबसे खूनखराबे भरे रहे. इस दौरान 2,010 सांप्रदायिक हमले हुए. भीड़ ने सरकारी इमारतों, पुलिस स्टेशनों और हिंदुओं के घरों-दुकानों को निशाना बनाया. ढाका के बिजोयशरणी चौक पर शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्ति तोड़ी गई, शेख हसीना के कार्यालय में आग लगा दी गई. पुलिस डर के मारे अंडरग्राउंड हो गई थी, और सेना भी सीमित दायरे में सक्रिय थी. इस अराजकता में कट्टरपंथी धार्मिक समूहों ने हिंदुओं को निशाना बनाया. बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के मुताबिक, इन 15 दिनों में 1,705 अल्पसंख्यक परिवारों पर हमले हुए, 157 घरों और दुकानों में लूटपाट और आगजनी की गई.

हत्याओं का सिलसिला: हिंदुओं पर किए गए क्रूर हमले
तख्तापलट के बाद हिंदुओं पर हमले सुनियोजित तरीके से हुए. कई मामलों में मजहबी दुश्मनी साफ नजर आई. कुछ प्रमुख घटनाएं:
- प्रदीप कुमार भौमिक: सिराजगंज के पत्रकार प्रदीप को 4 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने प्रेस क्लब में घेरकर पीट-पीटकर मार डाला.
- मृणाल कांति चटर्जी: बागेरहाट के 65 वर्षीय रिटायर्ड टीचर मृणाल को 5 अगस्त को भीड़ ने घर में घुसकर मार डाला. उनकी पत्नी और बेटी भी घायल हुईं.
- हराधन रॉय: रंगपुर के नगर निगम पार्षद हराधन और उनके भतीजे की 4 अगस्त को हत्या कर दी गई.
- सुशांत सरकार: ब्राह्मणबारिया के 30 वर्षीय सुशांत को 18 अगस्त को गांव के एक व्यक्ति ने बुलाकर हत्या कर दी. उनकी लाश मेघना नदी के किनारे मिली.
- इनके अलावा, 5 अगस्त को संतोष चौधरी, अजीत सरकार और 8 अगस्त को स्वपन बिस्वास जैसे कई हिंदुओं की क्रूर हत्याएं हुईं.
मंदिरों पर हमले: धार्मिक स्थलों को किया गया तबाह
हिंदू मंदिरों को निशाना बनाना हिंसा का एक प्रमुख हिस्सा रहा. बांग्लादेश (Bangladesh) हिंदू-बुद्धिस्ट-क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अगस्त, 2024 से 30 जून, 2025 तक 192 मंदिरों पर हमले हुए. मूर्तियां तोड़ी गईं, मंदिरों में आगजनी की गई. ढाका, चटगांव, खुलना और रंगपुर जैसे शहरों में मंदिरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा. इन हमलों ने हिंदू समुदाय में डर का माहौल और गहरा कर दिया.

महिलाओं पर अत्याचार: मुस्लिम हमलावरों के कुकृत्य
महिलाओं के खिलाफ हिंसा भी इस दौर में चरम पर रही. रिपोर्ट के अनुसार, 10 महीनों में 33 रेप के मामले दर्ज किए गए. कई पीड़ित महिलाओं ने बताया कि हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया क्योंकि वे हिंदू थीं या अवामी लीग से जुड़ी थीं. ये घटनाएं न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक आघात का कारण बनीं.
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मो. यूनुस सरकार का दोगला रवैया: वादे और हकीकत
बांग्लादेश (Bangladesh) में डॉ. मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में बनी अंतरिम सरकार ने शांति स्थापित करने का वादा किया था, लेकिन हिंदू समुदाय की हालात में कोई सुधार नहीं हुआ. गोविंद चंद्र प्रामाणिक, जो बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू महाजोत के अध्यक्ष भी हैं, कहते हैं, “सरकार की नीतियों में हिंदू कहीं नहीं हैं. सलाहकार परिषद में एक भी हिंदू सदस्य नहीं है. 11 सुधार समितियों में भी हिंदुओं को जगह नहीं दी गई.”
मीडिया में हिंसक घटनाओं की लगातार खबरें छपने और इंटरनेशनल कम्युनिटीज द्वारा आवाज उठाने पर बांग्लादेश में स्थानीय प्रशासन ने कुछ हमलावरों को गिरफ्तार किया, लेकिन अब तक किसी पर मुकदमा नहीं चला. बहरहाल, हिंदू समुदाय को लगता है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा.

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इस्कॉन विवाद: हिंदू धर्मगुरुओं को जेल में ठूंसा गया
बांग्लादेश (Bangladesh) में 25 नवंबर, 2024 को इस्कॉन से जुड़े धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप था. इस गिरफ्तारी के खिलाफ हिंदू समुदाय ने देशभर में प्रदर्शन किए, जिसके दौरान सैफुल इस्लाम आलिफ की हत्या हो गई. इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम तनाव को और बढ़ा दिया. मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदु बस्तियों में हमले किए. इस दौरान कई महिलाओं की अस्मिता लूटी गई और बच्चों को मार डाला गया.

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हिंसा की वारदातों पर मो. यूनुस की सरकार का रूख
डॉ. मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में बनी अंतरिम सरकार ने नवंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में दावा किया कि बांग्लादेश (Bangladesh violence) में जो हिंसक घटनाएं हुईं, वे हमले सांप्रदायिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और निजी दुश्मनी के कारण हुए. हालांकि, हिंदू संगठनों और पीड़ितों का कहना है कि ज्यादातर हमले मजहबी नफरत से प्रेरित थे. ढाका के हिंदू निवासी देबाशीष कहते हैं, “1947 के बाद भी हिंदू इतने डरे हुए नहीं थे, जितना आज डर का माहौल है.” वे कहते हैं कि एक साल पहले हुआ तख्तापलट आज तक दर्द दे रहा है.
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