US Israel Iran conflict: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कहा है कि रूस से मिलने वाले तेल पर दी गई छूट अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अंतिम फैसला यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट करेगा. रूबियो का कहना है कि छूट जारी रखना या खत्म करना मौजूदा वैश्विक ऊर्जा हालात और अमेरिका की व्यापक नीतियों पर निर्भर करता है. इस बयान ने पहले से ऊंची तेल कीमतों के बीच बाजार की चिंता और बढ़ा दी है.
भारत की तेल डील
यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस से दूरी बना ली तब भारत ने मौके का फायदा उठाया. रूस ने डिस्काउंट पर तेल बेचना शुरू किया और भारत ने खरीद बढ़ा दी. सस्ता दाम, मैनेज करने लायक शिपिंग रूट और रिफाइनर कंपनियों के लिए अच्छा मुनाफा इन सबने रूसी तेल को भारत के लिए बेहद आकर्षक बना दिया. धीरे-धीरे रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया.
फारस की खाड़ी में तनाव
ईरान युद्ध और फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को और अस्थिर कर दिया. डर था कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत और UAE से सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी बीच अमेरिका ने कुछ समय के लिए पाबंदियों में ढील दी और देशों को पहले से लोड किए गए रूसी कार्गो खरीदने की छूट दी. भारत और इंडोनेशिया ने इसका फायदा उठाया. वॉशिंगटन ने इसे ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी बताया, लेकिन अमेरिकी सांसदों और यूरोपीय देशों ने दबाव बनाया कि यह छूट रूस को ज्यादा कमाई का मौका दे रही है.
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती
भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से ज्यादा आयात करता है. ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी सीधे महंगाई, सरकारी बजट और आर्थिक विकास पर असर डालती है. छूट के दौरान भारत ने रूसी तेल पर बहुत ज्यादा भरोसा किया. केप्लर डेटा बताता है कि मई में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया. कुछ महीनों में यह भारत के कुल आयात का लगभग आधा हो गया. सस्ता रूसी तेल भारत को वैश्विक कीमतों के झटके से बचा रहा था.
छूट खत्म होने के बाद की स्थिति
अगर अमेरिकी दबाव के चलते भारत को रूस से खरीद घटानी पड़ी, तो उसे फिर से मिडिल ईस्ट सप्लायर पर निर्भर होना पड़ेगा. लेकिन वहां हालात पहले से अस्थिर हैं और कीमतें ऊंची हैं. इससे भारत का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है. लंबे समय तक ऊंची कीमतें रहने पर इसका असर आम लोगों तक पहुंचता है. पेट्रोल, डीजल, LPG, हवाई किराया, ट्रांसपोर्ट और खाने-पीने की चीजें सब महंगी हो जाती हैं.
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रूस से मिलने वाली छूट खत्म होने का मतलब भारत के लिए बड़ा झटका हो सकता है. तेल पर भारी निर्भरता और वैश्विक बाजार की अस्थिरता मिलकर महंगाई को और बढ़ा सकती हैं. आने वाले समय में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर नए सिरे से सोचने की जरूरत होगी, क्योंकि तेल की कीमतें सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर डालती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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