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आखिर संसद में कैसे पहुंची सिर कटी मछली, पार्लियामेंट में सांसदों ने मचाया बवाल

Australia Parliament: सांसद सारा हैनसन-यंग ने ऑस्ट्रेलियाई संसद में मरी हुई सैल्मन मछली दिखाकर तस्मानिया में सैल्मन फार्मिंग के नए कानूनों का विरोध किया, जिससे दुर्लभ माउजियन स्केट के विलुप्त होने का खतरा बढ़ सकता है.

Australia Parliament

ऑस्ट्रेलिया की संसद में एक अनोखा वाकया देखने को मिला, जब सांसद सारा हैनसन-यंग सिर कटी हुई मरी सैल्मन मछली लेकर पहुंच गईं. आमतौर पर संसद में पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन होते हैं, लेकिन इस घटना ने सभी को चौंका दिया. यह मामला 26 मार्च (बुधवार) का है, जब उन्होंने संसद में मछली निकालकर सरकार के फैसले का विरोध किया. उनका यह विरोध तस्मानिया के मैक्वेरी हार्बर में सैल्मन फार्मिंग को बढ़ावा देने वाले नए कानूनों के खिलाफ था.

सारा हैनसन-यंग का कहना है कि नए कानून से पहले से संकट में मौजूद माउजियन स्केट नामक दुर्लभ समुद्री जीव के विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाएगा. संसद में मरी हुई मछली दिखाते हुए उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “चुनाव से पहले क्या आपने अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को एक सड़ी-गली, बदबूदार और विलुप्तप्राय सैल्मन के लिए बेच दिया है?”

संसद अध्यक्ष का हस्तक्षेप

सांसद के इस प्रदर्शन पर संसद अध्यक्ष सू लाइंस ने तुरंत आपत्ति जताई. उन्होंने मछली हटाने का निर्देश देते हुए कहा, “मेरा काम संसद में अनुशासन बनाए रखना है. यह एक प्रॉप है, कृपया इसे हटाएं.” इसके बाद मछली को वहां से हटा दिया गया.

हॉलीवुड अभिनेता ने भी जताई चिंता

सरकार के इस फैसले के खिलाफ कई लोग आवाज उठा रहे हैं. हॉलीवुड स्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “इस हफ्ते ऑस्ट्रेलियाई सरकार मैक्वेरी हार्बर का भविष्य तय करेगी. उसके पास विनाशकारी सैल्मन फार्मों को बंद करने का मौका है, जिससे माउजियन स्केट को बचाया जा सके.”

डिकैप्रियो ने आगे लिखा कि यह इलाका पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है और इसे “Key Biodiversity Area” का दर्जा दिया गया है. उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे माउजियन स्केट को विलुप्त होने से बचाने और इस प्राकृतिक क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए आवाज उठाएं.

क्या है पूरा विवाद?

2012 में सरकार ने इस क्षेत्र में सैल्मन फार्मिंग को मंजूरी दी थी. इसके बाद से माउजियन स्केट की संख्या तेजी से घटने लगी. मौजूदा समय में इनकी संख्या महज 1,000 के करीब रह गई है. सरकार का दावा है कि नए कानून से रोजगार बढ़ेगा, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे समुद्री जीवों पर खतरा बढ़ जाएगा. खासकर, माउजियन स्केट के पूरी तरह विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है.

यह मामला अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है. पर्यावरणविदों और कार्यकर्ताओं ने सरकार से सैल्मन फार्मिंग पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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