Bengal Exit Poll Bangladesh Reaction: पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद आए एग्जिट पोल्स ने बांग्लादेश की राजनीति में बेचैनी पैदा कर दी है. बांग्लादेश की संसद में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के सांसद अख्तर हुसैन ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बंगाल में भाजपा की संभावित जीत (Bengal Elections 2026) बांग्लादेश के लिए एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट का कारण बन सकती है. उन्होंने आशंका जताई है कि भाजपा सरकार बनने पर ‘अवैध घुसपैठियों’ के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों को बांग्लादेश की सीमा में धकेला जा सकता है.
संसद में गूंजा ‘कांगलू’ शब्द: शरणार्थी संकट का डर
रंगपुर सीट से सांसद अख्तर हुसैन ने बांग्लादेशी संसद में बोलते हुए कहा कि एग्जिट पोल्स (Bengal Elections Exit Poll) में भाजपा को बढ़त मिलना ढाका के लिए खतरे की घंटी है. उन्होंने ‘कांगलू’ (बांग्लादेश से आए अवैध मुस्लिम घुसपैठियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है, तो वे इन लोगों को बांग्लादेश में धकेल देंगे. इससे हमारे देश के लिए एक बड़ा शरणार्थी और आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.
अवैध घुसपैठियों की घर वापसी का डर
अख्तर हुसैन ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भाजपा का चुनावी एजेंडा हमेशा से अवैध घुसपैठ को रोकना और उन्हें वापस भेजना रहा है. उन्हें डर है कि यदि 4 मई को नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं, तो सीमा पार से लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है. सांसद के इस बयान के बाद बांग्लादेशी संसद में काफी देर तक भारत और खासकर बंगाल के चुनावी रुझानों पर गरमागरम बहस हुई.
एग्जिट पोल्स ने कैसे बढ़ाया पारा?(Bengal Elections Exit Poll)
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए हुए चुनाव में इस बार रिकॉर्ड 92.85% मतदान दर्ज किया गया है. ज्यादातर एग्जिट पोल्स राज्य में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनते हुए दिखा रहे हैं. हालांकि, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने इन पोल्स को सिरे से खारिज करते हुए अपनी जीत का दावा किया है. लेकिन सरहद पार से आ रही प्रतिक्रियाएं यह बताती हैं कि इस चुनाव के नतीजे केवल भारत ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी कितने मायने रखते हैं.
4 मई को ‘महासंग्राम’ का फैसला
बंगाल की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसका आधिकारिक फैसला 4 मई 2026 को मतगणना के बाद होगा. फिलहाल, बांग्लादेशी राजनेताओं के बयानों ने इस चुनावी जंग को एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मोड़ दे दिया है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और बीएसएफ (BSF) भी सरहद पर कड़ी नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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