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चुप नहीं था चीन…; जानें पीछे के रास्ते से ड्रैगन ने कैसे रुकवाई अमेरिका-ईरान जंग?

China Roll In US Iran Ceasefire: दुनिया को लगा चीन शांत है, लेकिन ड्रैगन ने ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ से बड़ा खेल कर दिया. जानें कैसे पाकिस्तान और तुर्किए के जरिए चीन ने अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का सीजफायर कराया और होर्मुज स्ट्रेट खुलवाया.

China Roll In US Iran Ceasefire

China Roll In US Iran Ceasefire: दुनिया को लग रहा था कि अमेरिका-ईरान के बीच भड़के इस महायुद्ध में चीन खामोश बैठा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी. वैश्विक ऊर्जा और इकॉनमी पर मंडराते खतरे के बीच ड्रैगन शांत नहीं था, बल्कि वह पर्दे के पीछे से एक बहुत बड़ा ‘गेम’ खेल रहा था. चीन ने सीधे तौर पर सामने आने के बजाय ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ (Backdoor Diplomacy) का ऐसा शानदार इस्तेमाल किया, जिसने विनाशकारी जंग पर ब्रेक लगा दिया.

पाकिस्तान और तुर्किए के जरिए बिछाई बिसात

चीन ने इस विवाद में सीधे मध्यस्थता करने से ऑफिशियली इनकार कर दिया था, लेकिन उसने पर्दे के पीछे अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. बीजिंग ने तेहरान तक अपना कड़ा और स्पष्ट संदेश पहुंचाने के लिए पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र जैसे देशों का सहारा लिया. इन देशों के जरिए चीन ने ईरान को यह समझाने में कामयाबी हासिल की कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और लगातार जंग से ग्लोबल इकॉनमी और ऊर्जा सुरक्षा पर कितना बड़ा और विनाशकारी खतरा मंडरा रहा है.

US Iran Ceasefire में ड्रैगन की ‘दोहरी रणनीति’

चीन ने इस पूरे मामले में एक बेहद सधी हुई दोहरी कूटनीति (Dual Strategy) अपनाई. एक तरफ वह पीछे के रास्ते से शांति की कोशिशें कर रहा था, तो दूसरी तरफ उसने खुले तौर पर अमेरिका का विरोध कर ईरान का भरोसा भी जीता. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लाए गए एक प्रस्ताव पर चीन ने रूस के साथ मिलकर वीटो कर दिया. इस कदम से चीन ने ईरान को यह संदेश दिया कि वह उसके साथ खड़ा है.

चीनी विदेश मंत्रालय का शांति संदेश

भले ही चीन ने मध्यस्थता के रोल से इनकार किया, लेकिन उसके आधिकारिक बयानों में शांति की अपील साफ झलक रही थी. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सभी पक्षों से अपील करते हुए कहा था, “ईमानदारी दिखाएं और जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करें.” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यह जंग वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है.

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रंग लाई ड्रैगन की कूटनीति

चीन की यह पर्दे के पीछे की कूटनीति और ‘वीटो पावर’ का मास्टरस्ट्रोक आखिरकार रंग लाया. दोनों पक्षों को कूटनीतिक टेबल पर लाने के चीन के प्रयासों के चलते 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई. इतना ही नहीं, चीन के दबाव और समझाइश के बाद ईरान अगले 2 हफ्तों के लिए विवादित होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर भी राजी हो गया है.



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