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चीन के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर युद्ध का ग्रहण! जिनपिंग का ‘सपनों का महल’ ढहने की कगार पर? BRI पर मंडराया संकट

China BRI Project: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को गंभीर खतरे में डाल दिया है.

China BRI Project

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है, जिससे चीन की आर्थिक रणनीति पर दबाव बढ़ गया है.

होर्मुज से बढ़ी चीन की मुश्किलें

दरअसल, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर रोक जैसी स्थिति पैदा होने से दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है, अब महंगे दामों पर तेल खरीदने को मजबूर हो गया है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि शिपिंग लागत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. मिडिल ईस्ट से चीन तक तेल लाने वाले बड़े जहाजों का किराया दोगुना होकर करीब 4 लाख डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया है.

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव क्या है?

इस संकट का असर सीधे BRI प्रोजेक्ट्स पर भी दिख रहा है. 2013 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई यह योजना एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाली दुनिया की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है. इसमें लैंड बेल्ट के तहत सड़क, रेल और पाइपलाइन नेटवर्क, जबकि मैरीटाइम सिल्क रोड के जरिए समुद्री मार्ग विकसित किए जा रहे हैं. 150 से ज्यादा देशों में फैली इस परियोजना का दायरा वैश्विक GDP के करीब 40% हिस्से तक पहुंचता है.

जंग के चलते BRI प्रभावित

ईरान में BRI के तहत प्रस्तावित कई प्रोजेक्ट्स अब अनिश्चितता में फंस गए हैं. 2021 में चीन और ईरान के बीच हुए 25 साल के समझौते के तहत 300-400 अरब डॉलर के निवेश की योजना थी, लेकिन अब तक केवल 2-3 अरब डॉलर ही निवेश हो पाया है. युद्ध के चलते कई कॉन्ट्रैक्ट्स रुके हुए हैं और ईरान के जरिए बनने वाला लैंड कॉरिडोर भी ठप पड़ गया है.


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इसके अलावा, पाकिस्तान का CPEC और मिडिल ईस्ट के अन्य पोर्ट प्रोजेक्ट्स भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं. शिपिंग, इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी से चीन को सालाना अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2013 से अब तक BRI पर चीन करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है. ऐसे में मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष चीन की वैश्विक आर्थिक रणनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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