Thalassemia In Pakistan
Pakistan Study: पाकिस्तान में सदियों से चली आ रही ‘कजिन मैरिज’ (चचेरे, ममेरे, फुफेरे या मौसेरे भाई-बहनों में शादी) की परंपरा को लेकर हाल ही में आए वैज्ञानिक अध्ययनों और मेडिकल रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में एक ही कुनबे या खून के रिश्तों में शादियां होने के कारण वहां की आने वाली पीढ़ी एक बेहद गंभीर और खतरनाक जेनेटिक (आनुवंशिक) संकट की तरफ बढ़ रही है. इस रिसर्च के सामने आने के बाद से चिकित्सा जगत और समाजशास्त्रियों के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है.
क्या हुआ है वैज्ञानिकों की रिसर्च में खुलासा?
ग्लोबल मेडिकल रिपोर्ट्स और पाकिस्तान के स्वास्थ्य संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में कजिन मैरिज की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है. रिसर्च से पता चला है कि इन शादियों की वजह से पैदा होने वाले बच्चों में गंभीर आनुवंशिक बीमारियां, शारीरिक विकलांगता और मानसिक रूप से कमजोर होने का खतरा सामान्य बच्चों की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब दो करीबी खून के रिश्तेदार आपस में शादी करते हैं, तो उनके शरीर के खराब या सुप्त (Recessive) जीन्स आपस में मिल जाते हैं, जिससे आने वाली संतान में जन्मजात बीमारियां होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
महामारी की तरह फैल रही हैं ये बीमारियां
लगातार पीढ़ियों से एक ही परिवार में शादी करने का नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान में कुछ बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारियां अब एक बड़े संकट का रूप ले चुकी हैं:
थैलेसीमिया (Thalassemia): यह एक गंभीर रक्त विकार (Blood Disorder) है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन बनना बंद या कम हो जाता है. पाकिस्तान में हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा हो रहे हैं, जिन्हें जिंदा रहने के लिए पूरी जिंदगी हर महीने खून चढ़वाना पड़ता है.
अंधापन और बहरापन: रिसर्च के मुताबिक, जन्मजात रूप से मूक-बधिर (बोलने और सुनने में अक्षम) और दृष्टिहीन बच्चों की संख्या कजिन मैरिज वाले परिवारों में बहुत ज्यादा देखी गई है.
अंगों का ठीक से विकास न होना: कई मामलों में बच्चों के हाथ-पैर या दिमागी विकास जन्म से ही पूरी तरह रुक जाता है.
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समाज का दबाव और जागरूकता की कमी
वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के बार-बार आगाह करने के बावजूद पाकिस्तान में इस परंपरा को तोड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. वहां के समाज में यह माना जाता है कि परिवार के भीतर शादी करने से संपत्ति बाहर नहीं जाती, पारिवारिक रिश्ते मजबूत रहते हैं और लड़की सुरक्षित रहती है. हालांकि, इस सामाजिक सोच की भारी कीमत वहां के मासूम बच्चों को अपनी सेहत और जिंदगी देकर चुकानी पड़ रही है.
अब पाकिस्तानी डॉक्टरों का भी मानना है कि अगर इस परंपरा पर कानूनी रोक या शादी से पहले अनिवार्य ‘जेनेटिक ब्लड टेस्ट’ (जैसे थैलेसीमिया टेस्ट) का नियम नहीं बनाया गया, तो आने वाले समय में पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था इस जेनेटिक बोझ को संभालने में पूरी तरह नाकाम हो जाएगी.
भारत एक्सप्रेस
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