दुनिया में कोरोना महामारी के लॉकडाउन जैसे हालात हो सकते हैं. (फोटो— प्रतीकात्मक, AI से बनाया.)
Oil Crisis in Global Economy: दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. अगर ईरान और अमेरिका के बीच जंग जून तक चलती रही और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. यह चेतावनी दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मैक्वारी ने दी है.
मैक्वारी के विशेषज्ञों ने कहा कि अगर संघर्ष दूसरी तिमाही यानी जून तक खिंचता है तो तेल की असली कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी. उन्होंने 40 प्रतिशत संभावना बताई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से तेल 200 डॉलर तक जा सकता है. लेकिन 60 प्रतिशत संभावना है कि मार्च के अंत तक जंग में कमी आ जाए.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है. यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. ईरान के नियंत्रण वाले इस रास्ते के बंद होने से एशिया की तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो कीमतें इतनी बढ़ेंगी कि वैश्विक तेल की मांग में भारी गिरावट आ सकती है.

तेल की कीमतों में भारी उछाल
27 मार्च को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.82 प्रतिशत बढ़कर 111.06 डॉलर प्रति बैरल हो गया. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 2.68 प्रतिशत बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. यह पिछले कई महीनों में तेल की सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी है.
आने वाले दिनों में भारत पर असर
भारत जैसे देश जो कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इस स्थिति से परेशान हो सकता है. महंगाई बढ़ने, पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने और आम आदमी के खर्च में इजाफा होने की आशंका है. पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी संकट आ सकता है.

ईरान से ट्रंप की बातचीत कैसी रही?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले 6 अप्रैल तक रोक दिए गए हैं. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान से बातचीत अच्छी चल रही है.
अब चीन के जहाज भी नहीं गुजर रहे?
जंग शुरू होने के बाद पहली बार दो चीनी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की कोशिश में थे. लेकिन उन्हें रोका गया और वापस भेज दिया गया. ये जहाज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी सीओएससीओ के थे.

संघर्ष बढ़ा तो आएगा महंगाई का तूफान
एक्सपर्ट कह रहे हैं कि अभी स्थिति अनिश्चित है. अगर जंग जल्दी खत्म हुई तो तेल की कीमतें नियंत्रण में रह सकती हैं. लेकिन अगर संघर्ष बढ़ा तो महंगाई का तूफान आ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अभी इस बड़े खतरे को कम आंक रहा है.
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