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ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात से रूस-यूक्रेन युद्ध के अंत की उम्मीद, क्या होगा शांति समझौता?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की मुलाकात के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीद बढ़ी. क्या शांति समझौता संभव है? जानें पूरी खबर.

Trump Zelenskyy

डोनाल्ड ट्रंप और वोलडिमिर जेलेंस्की.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की मुलाकात राजनीतिक हलको में काफी चर्चा में है. दोनों के बीच काफी बहस हुई और ज़ेलेंस्की बैठक छोड़कर चले भी गए लेकिन बाद में यूक्रेन के मुखिया ने अपने X पर लिखा कि वे अमेरिकी सहयोग के लिए डोनालड ट्रंप के आभारी हैं. दोने नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात के बाद ऐसा माना जा रहा है कि रूस और यूक्रेम के बीच वर्षों से जारी युद्ध का शायद अब अंत होनो वाला है. इसके आसार ऐसे भी प्रबल दिख रहें हैं क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा कि समझौते की जो भी शर्त होगी वह रूस के राष्ट्रपति वोलोदिमीर पुतिन को भी मानना होगा .

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने X पर लिखा कि “आज व्हाइट हाउस में हमारी बहुत सार्थक बैठक हुई. बहुत कुछ सीखा गया बातचीत के बिना कभी नहीं समझा जा सकता था. राष्ट्रपति जेलेंस्की शांति के लिए तैयार नहीं हैं, ,मैं लाभ नहीं चाहता, मैं शांति चाहता हूं. – राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प

यूक्रेन समर्थन के लिए अमेरिका का आभारी है. मैं राष्ट्रपति ट्रम्प, और अमेरिका का समर्थन के लिए आभारी हूं. यूक्रेन ने हमेशा इस समर्थन के लिए अमेरिका की सराहना की है, पिछले तीन वर्षों में जिस तरह अमेरिका ने साथ दिया है सराहनीय है .- वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

दरअसल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिका के लोगों में इस बात की चिंता थी कि अगऱ रूस और यूक्रेन के बीच का युद्ध समाप्त नहीं होता तो अमेरिका के हालात और खराब हो सकते हैं. लोगों को यह भी उम्मीद थी कि यह युद्ध तभी समाप्त होगा जब ट्रंप चुनाव जीत कर फिर से राष्ट्रपति बनेंगे और कमला हैरिस में रूस और यूक्रेन का मुद्दा भी कारण बना. अब बारी ट्रंप की है जिन्हें लोगों को भरोसा दिलाना होगा कि अगर चुनाव में उन्होंने लोगों से वादा किया था तो अब पूरा भी करेंगे. इन तमाम गतिविधियों के बीच यह जानना जरूरी है कि आखिर रूस और यूक्रेन का विवाद क्या है.

रूस और यूक्रेन का विवाद

यूक्रेन ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण, निभाई है, और आज, चीन और अमेरिका के बीच जारी प्रतिद्वंद्विता की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में है, जिसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दशकों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर हावी रहेगा. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने आठ साल से जारी पुराने संघर्ष की यादों को ताजा कर दिया जो रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्ज़ा करने के साथ शुरू हुआ और यूरोपीय सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ का संकेत दिया. लड़ाई शुरू होने के एक साल बाद, कई रक्षा और विदेश नीति विश्लेषकों ने इस युद्ध को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक बड़ी रणनीतिक भूल बताया. राजनीतिक पर्यवेक्षकों की अगर माने तो इस समस्या के राजनयिक समाधान की संभावना बहुत कम दिखती है और रूस द्वारा परमाणु हथियार के उपयोग की आशंका भी जताते हैं.

खनिज भंडारण और यूक्रेन

यूक्रेन में सबसे महत्वपूर्ण अयस्क क्षेत्र क्रिवी रिह लौह अयस्क बेसिन है, जो मध्य यूक्रेन में स्थित है, जिसमें देश के अधिकांश लौह अयस्क भंडार हैं और यह इसके बड़े लौह और इस्पात उद्योग की नींव है; अन्य महत्वपूर्ण अयस्क क्षेत्रों में बेलोज़ेर्स्की लौह अयस्क जिला, प्रियाज़ोव्स्की लौह अयस्क क्षेत्र और केर्च लौह अयस्क बेसिन शामिल हैं, सभी में पर्याप्त लौह अयस्क भंडार हैं. क्रिवी रिह, क्रेमेनचुक, बिलोज़ेरका, मारियुपोल और केर्च के आसपास स्थित समृद्ध लौह अयस्क भंडार यूक्रेन के बड़े लौह और इस्पात उद्योग का आधार बनाते हैं. दुनिया में मैंगनीज युक्त अयस्कों के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक निकोपोल के पास स्थित है. दरअसल चीन की नजर इस भंडारण पर है और वह चाहता है कि किसी भी तरीके से यह क्षेत्र रूस के कब्जे में आ जाए और चीन परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इस पर कब्जा जमा ले.

रूस-चीन संबध और अमेरिका

चीन और रूस का 2019 तक, संयुक्त राज्य अमेरिका से गंभीर शिकायतें थीं. चीन के लिए, मुद्दे दक्षिण चीन सागर पर नियंत्रण, व्यापार नीतियां और प्रौद्योगिकी नीति थे. रूस के लिए, मुख्य मुद्दा यूक्रेन से क्रीमिया की जब्ती को दंडित करने के लिए अमेरिका और यूरोप द्वारा लगाए गए गंभीर आर्थिक दंड था. हालांकि, चीन और रूस कुछ नीतियों पर भिन्न हैं. चीन रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जे को मान्यता नहीं देता है  और रूस दक्षिण चीन सागर में चीन के दावों का समर्थन नहीं करता है फिर भी, चीन और रूस के बीच वर्तमान में 1950 के दशक के बाद से सबसे अच्छे संबंध हैं. हालाँकि उनका कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक कदमों का समन्वय करने और संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ गठबंधन बनाने के लिए एक अनौपचारिक समझौता है.

दरअसल विश्व किसी भी तरीके से तीसरे विश्वयुद्ध को लिए तैयार नहीं है और वर्षों से रूस और यूक्रेम के बीच जारी युद्ध अगर अब समाप्त नहीं होता तो विश्व को तीसरे विश्वयुद्ध का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की मुलाकात के बाद हम उम्मीद कर सकते हैं कि जल्द ही दोनों देशों के बीच जारी युद्ध खत्म होगा. इस सोंच को इसलिए भी ताकत मिलती है क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चाहते है कि दोनो देशो के बीच शांति स्थापित हो.

-भारत एक्सप्रेस



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