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बढ़ते वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर (Jaishankar) ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में बढ़ते संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और जबरदस्ती पर चिंता जताई और देशों से इसे स्थिर करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया.
Jaishankar ने SCO की बैठक को किया संबोधित
तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर (S. Jaishankar) ने साझा वैश्विक हितों को खतरे में डालने वाली लगातार चुनौतियों का समाधान करते हुए वैश्विक ढांचे को जोखिम मुक्त करने पर जोर दिया.
एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में काफी अव्यवस्था व्याप्त है. पिछले कुछ वर्षों में हमने संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और दबाव में वृद्धि देखी है. आर्थिक अस्थिरता भी स्पष्ट रूप से बढ़ रही है. हमारे सामने चुनौती वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने, विभिन्न आयामों को जोखिम मुक्त करने और इन सबके माध्यम से उन दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करने की है जो हमारे सामूहिक हितों के लिए खतरा हैं.”
चीनी विदेश मंत्री और सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य वांग यी ने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की परिषद के सदस्य देशों की बैठक के दौरान एससीओ के भविष्य के विकास के लिए पांच प्रमुख सुझाव प्रस्तावित किए, तथा वैश्विक अशांति के बीच इसकी भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया.
चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में, वांग ने एससीओ के लिए दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य संगठन को सदियों पुराने परिवर्तनों के दौर में मार्गदर्शन करना है, जहां बहुध्रुवीयता और आर्थिक वैश्वीकरण गहरा रहा है, फिर भी आधिपत्य, संरक्षणवाद और क्षेत्रीय संघर्ष जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं.
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बयान में वांग के हवाले से कहा गया, “वर्तमान में, सदियों पुराने परिवर्तन तेज़ी से हो रहे हैं, और अशांति और परिवर्तन आपस में गुंथे हुए और प्रतिध्वनित हो रहे हैं. दुनिया अधिक बहुध्रुवीय होती जा रही है, आर्थिक वैश्वीकरण गहरा रहा है, और वैश्विक दक्षिण का उल्लेखनीय विकास हो रहा है. साथ ही, आधिपत्य और शक्ति प्रवृत्ति के विरुद्ध जा रहे हैं, संरक्षणवाद बढ़ रहा है, और क्षेत्रीय संघर्ष एक के बाद एक उभर रहे हैं. नई परिस्थितियों में, सदस्य देशों को इतिहास और भविष्य के प्रति ज़िम्मेदाराना रवैये के साथ एससीओ के निर्माण को मज़बूत करने पर और अधिक आम सहमति बनानी चाहिए.”
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-भारत एक्सप्रेस
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