अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने आर्कटिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
US Denmark Greenland Agreement: बर्फ से ढके ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच एक अहम समझौते की तैयारी चल रही है. प्रस्तावित डील के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में दो जगहों पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर हो चुका है.
इस योजना में दक्षिणी ग्रीनलैंड के नरसार्सुआक में पुराने अमेरिकी सैन्य अड्डे को दोबारा सक्रिय करना शामिल है. इसके अलावा पूर्वी ग्रीनलैंड के मेस्टर्सविग में एक नया सैन्य ठिकाना विकसित करने की बात सामने आई है. खास बात यह है कि मेस्टर्सविग में अभी डेनमार्क की विशेष सैन्य इकाई ‘सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल’ तैनात है.
IT’S OFFICIAL: @POTUS joins the Prime Ministers of Denmark and Greenland in signing the historic security agreement 🇺🇸🇩🇰🇬🇱 https://t.co/Pab9z75yJL pic.twitter.com/5pehzBiS8i
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) September 22, 2026
शीत युद्ध से जुड़ा है पुराना बेस
नरसार्सुआक में अमेरिका ने शीत युद्ध के दौर में ‘ब्लू वेस्ट वन’ नाम का सैन्य अड्डा बनाया था. यह बेस 1950 के दशक में बंद कर दिया गया था. इसके बाद इलाके की आबादी भी काफी कम हो गई और यहां अब केवल कुछ दर्जन लोग रहते हैं.
मेस्टर्सविग में फिलहाल डेनमार्क की सेना की डॉग स्लेज पेट्रोल यूनिट आर्कटिक इलाके में निगरानी और गश्त का काम करती है. नए समझौते से इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं.
हालांकि, प्रस्तावित डील का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है. मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, हस्ताक्षर होने तक समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव संभव है. व्हाइट हाउस ने भी इसकी विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया है. उसका कहना है कि यह समझौता ग्रीनलैंड और अमेरिका की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा.
आर्कटिक सुरक्षा पर बढ़ेगा NATO का फोकस
डेनमार्क के मुताबिक, समझौते के बाद आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को NATO के व्यापक सुरक्षा ढांचे में देखा जाएगा. यानी इसकी जिम्मेदारी केवल अमेरिका और डेनमार्क तक सीमित नहीं रहेगी.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते रहे हैं. ट्रंप कई बार ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जाहिर कर चुके हैं और इस मुद्दे पर सैन्य तथा आर्थिक दबाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया था.
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ग्रीनलैंड के ज्यादातर लोग अमेरिका के साथ जाने के विचार का विरोध कर चुके हैं. शीत युद्ध के दौर में यहां अमेरिका के 17 सैन्य ठिकाने और 10 हजार से ज्यादा सैनिक थे. अब यहां मुख्य अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पिटफिक स्पेस बेस तक सीमित है, जहां करीब 150 अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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