Gulf countries railway project: कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में तेल और गैस की वजह से अपार संपत्ति है. इन देशों के शहरों में चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें, ऊंची-ऊंची इमारतें और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. यहां की सड़कों पर सुपरकारें दौड़ती हैं और फ्लाइंग टैक्सी जैसी सेवाएं भी शुरू होने वाली हैं. इसके बावजूद इन देशों में ट्रेनें नहीं दिखाई देतीं.
छोटे आकार और सीमित आबादी
कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में राष्ट्रीय रेल नेटवर्क नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण इनका छोटा भौगोलिक आकार और सीमित जनसंख्या है. लोग ज्यादातर छोटी दूरी की यात्रा करते हैं, जिसे कार और बस से आसानी से पूरा कर लिया जाता है. यही वजह है कि रेल की जरूरत महसूस नहीं होती.
सड़कें और मेट्रो का विकल्प
इन देशों ने आधुनिक एक्सप्रेसवे और शानदार सड़कें बनाई हैं. व्यक्तिगत कारें और बसें ही मुख्य परिवहन साधन हैं. लंबी दूरी की ट्रेनें न होने के बावजूद शहरी परिवहन को आसान बनाने के लिए मेट्रो नेटवर्क विकसित किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर कतर में दोहा मेट्रो सफलतापूर्वक चल रही है.
सऊदी और यूएई में रेल
खाड़ी देशों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पहले से ही रेल नेटवर्क चला रहे हैं. वहाँ लोग हाईस्पीड ट्रेन और इंटरसिटी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. बाकी देशों में अभी तक ट्रेनें नहीं हैं.
गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट
अब खाड़ी देशों को जोड़ने के लिए GCC रेलवे प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इसके तहत कुवैत, कतर, बहरीन, सऊदी अरब, यूएई और ओमान को 2,117 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इस परियोजना पर काम चल रहा है और आधा काम पूरा हो चुका है.
2030 तक ट्रेनें
घोषणा के अनुसार दिसंबर 2030 तक यह परियोजना पूरी हो जाएगी. इसके बाद लोग ट्रेन से कतर से बहरीन, कुवैत, ओमान होते हुए सऊदी अरब और यूएई तक यात्रा कर सकेंगे. समुद्र के ऊपर बने पुलों से बहरीन और कतर को भी जोड़ा जाएगा.
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फिलहाल स्थिति
सऊदी और यूएई को छोड़कर बाकी चार देशों में अभी ट्रेनें नहीं चल रही हैं. लेकिन 2030 तक गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट पूरा होने पर खाड़ी देशों में ट्रेन का सपना साकार होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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