US Israel Iran conflict: ईरान द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस के दाम तेजी से बढ़ गए हैं. इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सेना ने ईरान की नेवी और एयरफोर्स को कमजोर कर दिया है. साथ ही उन्होंने अन्य देशों से सैन्य हस्तक्षेप की मांग की है ताकि होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके.
ट्रंप की अपील और सात देशों से बातचीत
रविवार को ट्रंप ने कहा कि वह सात देशों से इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत कई देशों से आग्रह किया कि वे युद्धपोत भेजकर इस मार्ग को खुला रखने में मदद करें. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर नाटो देश उनकी अपील को नजरअंदाज करते रहे, तो नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.
अमेरिका का तर्क
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस मार्ग से बहुत कम तेल मिलता है, जबकि चीन जैसे देशों की 90% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. उनका कहना है कि अब जब ईरान की सेना कमजोर हो चुकी है, तो अन्य देशों को आगे आकर सुरक्षा में योगदान देना चाहिए.
सहयोग से पीछे हटते देश
हालांकि ट्रंप के दावों के बावजूद किसी भी देश ने अभी तक अमेरिका का साथ देने की हामी नहीं भरी है. ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा. इससे पहले ट्रंप ने सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों से भी मदद मांगी थी लेकिन उन्होंने डिफेंसिव नीति अपनाई.
ब्रिटेन से बातचीत
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने दो हफ्ते पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से बात की थी. उस समय ब्रिटेन अपने विमानवाहक जहाज भेजने में हिचकिचा रहा था. ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान पर जीत हासिल कर ली, तब जाकर ब्रिटेन ने मदद की पेशकश की. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका याद रखेगा कि किसने संकट के समय साथ दिया और किसने नहीं.
NATO देशों से अपील
ट्रंप ने नाटो देशों से भी सहयोग की अपील की है. उनका कहना है कि यह काम उतना बड़ा नहीं है जितना यूक्रेन की मदद करना, क्योंकि ईरान अब पहले जैसी ताकत नहीं रखता. उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब बहुत कम मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं और अमेरिका ने उनके नए हथियार बनाने की क्षमता को खत्म कर दिया है.
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ईरान को कमजोर करने का दावा
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अहम ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें खर्ग द्वीप भी शामिल है, जो ईरान का बड़ा ऑयल डिपो माना जाता है. उन्होंने दावा किया कि ईरान बातचीत करने के लिए उत्सुक है, लेकिन अभी तैयार नहीं है. उनका मानना है कि भविष्य में ईरान बातचीत के लिए सामने आएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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