इमरान खान को बड़ा झटका (AI जनरेटेड फोटो)
Pakistan Emergency in Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के शासन वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू कर दी गई है. रविवार को संविधान के दो प्रावधानों के तहत यह फैसला लिया गया. माना जा रहा है कि इसके बाद प्रांत में PTI सरकार की प्रशासनिक और राजनीतिक शक्तियों पर असर पड़ सकता है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी इमरान खान की रिहाई को लेकर इस्लामाबाद मार्च की तैयारी में जुटी हुई है.
कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने संघीय कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. इससे पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी. सरकारी बयान के अनुसार, बैठक में देश और विशेष रूप से प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी.
सरकार ने बताई इमरजेंसी की वजह
संघीय सरकार का आरोप है कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी और इस मोर्चे पर पीछे हट रही थी. इसी तर्क के आधार पर इमरजेंसी लागू करने का फैसला लिया गया. हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अब प्रांत का प्रशासनिक ढांचा किस तरह संचालित किया जाएगा.
प्रांतीय सरकार की शक्तियों पर पड़ सकता है असर
पाकिस्तान के संविधान में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनके तहत इमरजेंसी के दौरान संघीय सरकार किसी प्रांत के कुछ या सभी प्रशासनिक अधिकार अपने नियंत्रण में ले सकती है. ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा में PTI सरकार के अधिकार सीमित होने की आशंका जताई जा रही है.
मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी का दावा
इमरजेंसी लागू होने के कुछ समय बाद ही PTI सांसद जुनैद अकबर ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और प्रांत में पार्टी के अध्यक्ष को हिरासत में ले लिया गया है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
इमरान की रिहाई के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी
PTI अपने संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद तक मार्च निकालने की योजना बना रही है. इमरान खान पिछले तीन साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं. पार्टी ने पहले इस मार्च की तारीख 27 सितंबर तय की थी, लेकिन सरकार और PTI नेतृत्व के बीच बातचीत के चलते इसे 4 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया था.
राजधानी की घेराबंदी की तैयारी
सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा. इसके लिए राजधानी की ओर आने वाले प्रमुख रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाकर बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है.
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PTI ने फैसले पर उठाए सवाल
PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इमरजेंसी के फैसले की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि इस कदम से राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिससे हिंसा और अस्थिरता का खतरा पैदा होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत का रास्ता खुला था, लेकिन सरकार के फैसले से ऐसा लगता है कि वह किसी समझौते के मूड में नहीं थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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