Imran Khan jail condition UNHRC Kasim Khan statement: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेट जगत के दिग्गज इमरान खान की सलाखों के पीछे की जिंदगी अब ‘यातना गृह’ में तब्दील होती दिख रही है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) को संबोधित करते हुए इमरान के बेटे कासिम खान ने रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं. कासिम ने दुनिया के सामने दावा किया कि उनके पिता को उस ‘एकांत कारावास’ (Solitary Confinement) में रखा गया है, जो विशेष रूप से मौत की सजा पाए खूंखार कैदियों (Death Row Convicts) के लिए बनाया गया है.
2023 से जेल में बंद इमरान खान के स्वास्थ्य (Imran Khan jail condition) को लेकर कासिम ने बेहद चिंताजनक जानकारी दी कि उचित चिकित्सा और रोशनी के अभाव में उनके पिता की दाहिनी आंख की रोशनी धीरे-धीरे खत्म हो रही है. कासिम का यह संबोधन पाकिस्तान के मौजूदा हुक्मरानों के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका माना जा रहा है.
‘तीन साल से नहीं देखा पिता का चेहरा’
कासिम खान ने भावुक होते हुए परिषद को बताया कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों से अपने पिता का चेहरा तक नहीं देखा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का वर्तमान शासन राजनीतिक असहमति को विचार-विमर्श का हिस्सा नहीं, बल्कि एक ‘गंभीर अपराध’ मानता है.
कासिम के अनुसार, यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक इंसान की गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा ‘सुनियोजित उत्पीड़न’ (Deliberate Persecution) है. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की चेतावनियों का हवाला देते हुए कासिम ने कहा कि इमरान खान को दी जा रही अमानवीय परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ‘यातना’ की श्रेणी में आती हैं, जिसका उद्देश्य केवल एक राजनीतिक विचारधारा को कुचलना है.
पाकिस्तान पर प्रहार करते हुए और क्या बोला?
अपने संबोधन (Kasim Khan UN statement) में कासिम ने केवल अपने पिता की रिहाई की मांग नहीं की, बल्कि पाकिस्तान के बदलते कानूनी और सामाजिक ढांचे पर भी कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ईशनिंदा कानूनों (Blasphemy Laws) का दायरा बढ़ाकर आजीवन कारावास तक कर दिया है और आम नागरिकों को ‘आतंकवादी’ करार देकर समाज में नफरत का जहर घोला जा रहा है. कासिम ने OHCHR और वैश्विक मानवाधिकार संस्थाओं से आग्रह किया कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि वह संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप की राय का पालन करे और इमरान खान सहित उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करे जिन्हें केवल विरोध की आवाज उठाने के कारण जेलों में सड़ाया जा रहा है.
1992 के नायक से ‘कैदी नंबर 804’ तक का सफर
इमरान खान का सफर 1992 में पाकिस्तान को विश्व कप जिताने वाले महानायक से लेकर देश के प्रधानमंत्री और अब जेल की तंग कोठरी तक पहुँच गया है. 2018 से 2022 तक सत्ता में रहने के बाद, सेना के साथ उपजे तनाव और अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें पद से बेदखल कर दिया गया था. वर्तमान में उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं, जिनमें उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17 साल की सजा सुनाई गई है.
हालांकि इमरान के समर्थकों और उनके परिवार का मानना है कि ये सभी मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं. अब जब मामला संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पहुँच गया है, तो पाकिस्तान सरकार के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों का खतरा और बढ़ गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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