भारत और नॉर्वे के बीच रिश्ते पिछले कुछ सालों में लगातार मजबूत हुए हैं, और अब इन्हें नई दिशा मिलती दिख रही है. भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने साफ कहा है कि दोनों देशों की साझेदारी पहले से कहीं ज्यादा गहरी और सकारात्मक हुई है. उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा को दिया.
उनका कहना है कि यह पिछले 43 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा थी, और इस दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊर्जा दी.
ग्रीन पार्टनरशिप बनी सहयोग की नई पहचान
राजदूत स्टेनर ने बताया कि इस यात्रा के बाद भारत और नॉर्वे के बीच ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ और मजबूत हुई है. यह साझेदारी सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि आने वाले समय की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया सहयोग मॉडल है.
इस साझेदारी के तहत दोनों देश ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, पर्यावरण के अनुकूल समुद्री क्षेत्र और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. सर्कुलर इकोनॉमी का मतलब है संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना और कचरे को कम से कम करना, ताकि पर्यावरण पर दबाव घटे.
भारत में आयोजित कार्यक्रम में बयान
नई दिल्ली में ‘यारा इंडिया सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2025’ के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं. इस मौके पर उन्होंने नॉर्वे की प्रमुख कंपनी यारा इंटरनेशनल की भी तारीफ की, जो पिछले 15 सालों से भारत में सक्रिय है और जिसमें नॉर्वे सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है.
राजदूत ने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि यारा जैसी कंपनी लंबे समय से भारत में काम कर रही है और अब अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट भी जारी कर रही है.
उन्होंने यह भी बताया कि यारा के उर्वरक और तकनीकी समाधान आने वाले समय में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इससे न सिर्फ किसानों को फायदा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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