India Slams Pakistan in UN: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर भारत के खिलाफ झूठा रोना रोने पहुंचे पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहं की खानी पड़ी है. यूएन में भारत की युवा राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और उनके विदेश मंत्री इशहाक डार के दावों की धज्जियाँ उड़ाते हुए ऐसा करारा तंज कसा कि पूरा पाकिस्तान सन्न रह गया.
भारतीय राजनयिक ने साफ़ शब्दों में कहा कि ‘अगर भारतीय सेना द्वारा बर्बाद किए गए रनवे और हैंगर ही शहबाज़ शरीफ़ को अपनी ‘जीत’ लगते हैं, तो पाकिस्तान इस बर्बादी का आनंद उठा सकता है!’
UN में पाकिस्तान के जख्मों पर छिड़का नमक(India Slams Pakistan in UN)
संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के खोखले दावों की हवा निकाल दी. पाकिस्तान द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपने तबाह हुए सैन्य ठिकानों को छुपाने और फर्जी जीत का ढोल पीटने पर भारत ने चुटकी ली. भारत ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान अपनी कंगाली और सेना की तबाही पर चाहे जितने झूठे जश्न मना ले, दुनिया जानती है कि भारतीय सेना ने उसके घर में घुसकर क्या हश्र किया है.
हाफिज के सवाल पर ‘दुम दबाकर’ भागे शहबाज़ शरीफ़
UNGA के 81वें सत्र के दौरान उस वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की ज़बरदस्त फजीहत हो गई, जब अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया. पत्रकारों ने शहबाज़ से सीधे तीखे सवाल पूछे-‘आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?’ और ‘लश्कर संस्थापक हाफ़िज़ सईद पर आपका क्या रुख है?’
इन सवालों को सुनते ही शहबाज़ शरीफ़ के चेहरे का रंग उड़ गया और वे बिना एक शब्द बोले चुपचाप भाग खड़े हुए. ज्ञात हो कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका साबित हुई थी, जिसमें हाफ़िज़ सईद चार्जशीट में आरोपी नंबर-8 दर्ज है.
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सिंधु जलसंधि पर भारत का दोटूक जवाब
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशहाक डार ने सिंधु जलसंधि (Indus Waters Treaty) का रोना रोते हुए इस्लामिक देशों (OIC) के सामने गिड़गिड़ाने की कोशिश की. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने पलटवार करते हुए साफ़ कर दिया कि पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख पत्थर की लकीर है-‘पानी और ख़ून एक साथ नहीं बह सकता’. भारत ने कहा (India Slams Pakistan in UN) कि आर्बिट्रेशन कोर्ट का तथाकथित फैसला पूरी तरह गैर-कानूनी और अमान्य है, क्योंकि यह संधि के तय नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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