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ईरान ने ट्रंप के यूरेनियम सौंपने के दावे को खारिज किया, वार्ता पर असमंजस बरकरार

US Israel Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान यूरेनियम भंडार सौंपने पर सहमत हो गया है लेकिन ईरानी सूत्रों ने इसे खारिज कर दिया. वार्ता अभी निर्णायक मोड़ से दूर है और मतभेद बरकरार हैं.

US Israel Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को सौंपने पर सहमत हो गया है. उनका दावा था कि लंबे तनाव और बातचीत के बाद अब दोनों देश एक समझौते के करीब हैं.

ईरान ने किया खारिज

तेहरान के सूत्रों ने ट्रंप की बात को पूरी तरह नकार दिया. उनका कहना है कि अब तक किसी भी तरह की चर्चा यूरेनियम या अन्य परमाणु सामग्री सौंपने को लेकर नहीं हुई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे ‘एक और झूठ’ बताते हुए कहा कि वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.

बातचीत पर शर्तें

ईरानी सूत्रों ने साफ किया कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका उनकी शर्तों को मान लेगा. हालांकि, इन शर्तों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान का रुख अभी भी सशर्त है और वह बिना गारंटी के आगे नहीं बढ़ना चाहता.

ट्रंप का आशावाद

व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि छह हफ्तों के संघर्ष के बाद अब समझौते की संभावना मजबूत है. उन्होंने दावा
किया कि तेहरान परमाणु सामग्री सौंपने पर सहमत हो गया है. ट्रंप ने यहां तक कहा कि अगर इस्लामाबाद में समझौता होता है तो वे वहां यात्रा भी कर सकते हैं.

स्थायी प्रतिबंधों पर जोर

ट्रंप ने दोहराया कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. उन्होंने यूरेनियम संवर्धन पर अस्थायी रोक के विचार को खारिज करते हुए स्थायी प्रतिबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना था कि अगर यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे.

ईरान का सशर्त रुख

ईरानी सूत्रों ने कहा कि वार्ता अभी अधूरी है और अंतिम समझौते से काफी दूर है. उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु सामग्री हस्तांतरण जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. उनका मानना है कि वाशिंगटन के बयान समय से पहले दिए जा रहे हैं.

लचीलेपन का दावा

ट्रंप ने यह भी कहा कि हाल की बातचीत में ईरान पहले की तुलना में अधिक लचीला दिखा है. इसे उन्होंने सैन्य तनाव के बाद तेहरान के रुख में बदलाव का संकेत बताया. हालांकि, ईरानी पक्ष का कहना है कि असली प्रगति तभी होगी जब अमेरिका उनकी शर्तों को पूरा करेगा.

कूटनीति की नाजुक स्थिति

इन विरोधाभासी बयानों से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति बेहद नाजुक दौर में है. जहां वाशिंगटन संभावित सफलता को लेकर आशावादी है, वहीं तेहरान का रुख बताता है कि बड़े मतभेद अब भी बने हुए हैं.

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ट्रंप के दावे और ईरान की सख्त प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि परमाणु वार्ता अभी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है. दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और शर्तों पर असहमति इस प्रक्रिया को और जटिल बना रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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