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ग्रैंड मुफ्ती मुसलियार के ऑफिस के दावे को विदेश मंत्रालय ने सिरे से नकारा, Nimisha Priya को माफी मिलने की कही थी बात

Nimisha Priya: साल 2018 में निमिषा प्रिया को अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या कर उसके शव के टुकड़े करने के मामले में दोषी ठहराया गया था. जिसके चलते उन्हें 2020 में फांसी की सजा सुनाई गई थी.

Nimisha Priya को मिली ‘मौत से माफी’, ग्रैंड मुफ्ती मुसलियार के ऑफिस ने दी जानकारी - भारत एक्सप्रेस

ग्रैंड मुफ्ती कंथारमपुरम अबूबकर मुसलियार (Grand Mufti Kanthapuram Abubacker Musliyar) के कार्यालय ने इंडियन नर्स निमिषा प्रिया (Indian nurse Nimisha Priya) को यमन (Yemen) में मिली मौत की सजा (death sentence) में राहत (relief) मिलने का दावा किया; हालांकि, विदेश मंत्रालय ने निमिषा प्रिया डेथ सेंटेंस (Nimisha Priya death sentence) मामले में इस दावे को खारिज कर दिया है, जिससे यमन केस (Yemen case) में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

Nimisha Priya: यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया (Nimisha Priya) को मिली मौत की सजा को माफ किये जाने के ग्रैंड मुफ्ती कंथारमपुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय के दावे को विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया. दरअसल मुसलियार के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि निमिषा प्रिया को मिली मौत की सजा को पहले स्थगित किया गया था, अब उसे पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है. हालांकि अभी यमनी सरकार से इसकी आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं मिली है.

जिसपर विदेश मंत्रालय ने कहा कि, अभी भारत सरकार इस मामले को लेकर संबंधित लोगों के साथ बैठक कर रही है. अभी जो दावा किया गया है कि, निमिषा प्रिया को माफी मिल गई है. वो गलत है.

बता दें कि, साल 2018 में निमिषा प्रिया को अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या कर उसके शव के टुकड़े करने के मामले में दोषी ठहराया गया था. जिसके चलते उन्हें 2020 में फांसी की सजा सुनाई गई थी.

एएनआई के मुताबिक ग्रैंड मुफ्ती के ऑफिस ने बताया था कि यमन की राजधानी सना में एक हाईलेवल मीटिंग में निमिषा प्रिया की सजा को रद्द करने का फैसला लिया गया.

क्या है निमिषा प्रिया का मामला?

ईसाई परिवार से ताल्लुक रखने वाली 34 साल की निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं. 2008 में वो केरल गई थीं. वहां उनकी मुलाकात एक स्थानीय नागरिक तालाल अब्दो महदी से हुई. उन्होंने उसके साथ साझेदारी में एक क्लिनिक शुरू किया. कुछ समय तो सबकुछ सही चला लेकिन बाद में रिश्तों में खटास आ गई.

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि कुछ समय के बाद महदी ने निमिषा का उत्पीड़न करना शुरू कर दिया. बात यहां तक बढ़ गई कि महदी खुद को निमिषा का पति बताने लगा. उसने निमिषा का पासपोर्ट इसलिए जब्त कर लिया ताकि वो भारत ना लौट जाए.

ओवरडोज से महदी की हुई मौत

आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2017 में निमिषा ने कथित तौर पर अपना पासपोर्ट पाने के लिए महदी को बेहोश करने की कोशिश की, इसके लिए उसने किसी दवा का सहारा लिया. लेकिन ओवरडोज की वजह से महदी की मौत हो गई. जिसके बात यमनी अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

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2018 में निमिषा को अदालत ने दोषी करार दिया

2018 में निमिषा को अदालत ने दोषी करार दिया और 2020 में उसे फांसी की सजा सुना दी. जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया और मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसकी सजा के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया.

स्थिति तब ज्यादा गंभीर हो गई जब 2024 में यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-आलीमी ने उनकी फांसी मंजूर कर दी. इसके बाद भारत ने निमिषा को बचाने के लिए अपने प्रयास शुरू किये.

– भारत एक्सप्रेस



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