North Korea ICBM Hwasong-20: उत्तर कोरिया ने अपनी सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (ICBM) ‘ह्वासॉन्ग-20’ (Hwasong-20) को दुनिया के सामने पेश करके अमेरिका को चेतावनी दी है. यह मिसाइल उत्तर कोरिया के परमाणु शस्त्रागार में सबसे विध्वंसक मानी जा रही है, जिसकी रेंज 15,000 किलोमीटर बताई जा रही है.
उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन लंबे समय से ऐसी मिसाइल प्रणाली विकसित करने का प्रयास कर रहे थे जो ठोस ईंधन पर आधारित हो और पूरे अमेरिकी महाद्वीप को अपनी चपेट में ले सके. ह्वासॉन्ग-20 को उनके इसी मकसद की पूर्ति माना जा रहा है. इस मिसाइल के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्योंगयांग अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के विकास को किसी भी हाल में धीमा नहीं करने वाला है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय प्रतिबंधों और आलोचनाओं का दबाव बनाए रखे.

क्या है ह्वासॉन्ग-20 की खासियत?
ह्वासॉन्ग-20 एक थ्री-स्टेज वाली (Three-stage) ठोस-ईंधन (Solid-Fuel) ICBM है. ठोस ईंधन मिसाइलों को तरल ईंधन वाली मिसाइलों की तुलना में बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है और इन्हें भंडारण व परिवहन में भी आसानी होती है, जिससे दुश्मन के लिए इनका पता लगाना और नष्ट करना अत्यंत कठिन हो जाता है.
15,000 KM रेंज, MIRV क्षमता
उत्तर कोरियाई शासक का दावा है कि ह्वासॉन्ग-20 अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बनाने में सक्षम है, जिसमें मुख्य भूमि और प्रमुख शहर भी शामिल हैं. इसके अलावा, मिसाइल मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल्स (MIRV) ले जाने की क्षमता रखती है. MIRV एक ही मिसाइल को एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर गिराने की तकनीक है, जिससे यह मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में और भी घातक बन जाती है.

ह्वासॉन्ग-18 से 40% ज्यादा घातक
ह्वासॉन्ग-20 को नई जेनरेशन के शक्तिशाली इंजन से लैस किया गया है. यह नया इंजन 1,970 kN (किलो न्यूटन) का थ्रस्ट पैदा करता है, जो उत्तर कोरिया की पिछली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल ह्वासॉन्ग-18 के इंजन की तुलना में 40% ज्यादा ताकतवर है.
अब तक की सबसे ताकतवर ICBM
इंजन की यह अतिरिक्त शक्ति मिसाइल को भारी पेलोड (Payload) या अधिक परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता प्रदान करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि ह्वासॉन्ग-20, अपनी उन्नत विशेषताओं और क्षमता के कारण, अब तक की सबसे ताकतवर ICBM में से एक है.
उत्तर कोरिया के इस कदम को अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. यह नया विकास न केवल कोरियाई प्रायद्वीप के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है.
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