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“इतिहास खुद को दोहरा रहा है…”, असीम मुनीर की दूसरी अमेरिका यात्रा एक गंभीर चेतावनी: रिपोर्ट

Asim Munir: अगर अमेरिका फिर से इस चाल में फंसता है, तो इससे न सिर्फ़ पाकिस्तान का हौसला बढ़ेगा, बल्कि उस समय क्षेत्र में अस्थिरता भी आएगी, जब अमेरिका को अपनी साझेदारियों में विश्वसनीयता की जरूरत है.

Asim Munir

Asim Munir: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की अमेरिका यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के वास्तविक प्रयास के रूप में कम और वित्तीय सहायता, राजनीतिक ढाल और प्रभाव के नए चैनलों को सुरक्षित करने के प्रयास के रूप में अधिक देखा जा रहा है, जिसका उपयोग पाकिस्तान के “सैन्य-औद्योगिक आतंकवाद परिसर” के लिए किया जाएगा, जैसा कि सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा गया है.

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तानी सेना ने शीत युद्ध के बाद से अमेरिकी धन, हथियार और राजनयिक संरक्षण को अपने पास रख लिया है तथा उसे अपने संकीर्ण और विनाशकारी एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया है.

आतंकवाद पर हमेशा पाकिस्तान ने दिया है धोखा

ग्लोबल ऑर्डर की एक रिपोर्ट में कहा गया है.

“1980 के दशक में अमेरिका ने अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने के लिए पाकिस्तान में अरबों डॉलर खर्च किए. स्थिरता बनाने के बजाय, पाकिस्तान की खुफिया सेवा आईएसआई ने उन्हीं जिहादी नेटवर्क को पोषित किया, जिन्होंने आगे चलकर तालिबान और अल-कायदा को जन्म दिया. ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में पनाह मिली हुई थी, जो पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी से बस कुछ ही दूरी पर था, जबकि इस्लामाबाद वाशिंगटन के प्रति वफादारी की कसमें खाता रहा.”

पाकिस्तान खेलता रहा है दोहरा खेल

इसमें विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार 2000 के दशक में भी यही “दोहरा खेल” देखने को मिला, जहां बुश प्रशासन के तहत पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी था और फिर भी तालिबान नेतृत्व पाकिस्तानी धरती से स्वतंत्र रूप से अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा.

रिपोर्ट में कहा गया है,

“अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी, जबकि पाकिस्तान ने चुपचाप विद्रोहियों को सुरक्षित पनाहगाह, प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराए और उन्हें मार डाला. यह विश्वासघात कोई छुपी हुई बात नहीं थी, यह रणनीतिक था.”

पाकिस्तान आतंक का बन गया है केंद्र

आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हुए भी पाकिस्तान एक आतंकी केंद्र बना हुआ है. इसकी जमीन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादी समूहों को पनाह देती है, जो पड़ोसी देशों, खासकर भारत और अफ़ग़ानिस्तान को निशाना बनाते हैं और क्षेत्र से परे चरमपंथी विचारधारा का प्रचार करते हैं. ये समूह पाकिस्तानी सरकार के संरक्षण में काम करते हैं, जो अपने भू-राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उनकी हिंसक कार्रवाइ‌यों को निर्देशित करती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का आतंकवाद-विरोधी आख्यान अमेरिकी सहायता और हथियारों की आपूर्ति जारी रखने के लिए एक दिखावा है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अभियानों में पाकिस्तान की बढ़ती भागीदारी भी चिंता का विषय है, क्योंकि इसका दोहरा चरित्र का लंबा इतिहास रहा है.

महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी तक पाक की पहुंच है खतरनाक

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंटकॉम की खुफिया जानकारी और योजनाओं तक इस्लामाबाद की पहुंच मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है. पाकिस्तानी सेना के चरमपंथी नेटवर्कों के साथ मजबूत संबंध होने और अमेरिका व उसके सहयोगी हितों के विरोधी पक्षों को संवेदनशील खुफिया रिपोर्ट लीक करने का एक सुस्थापित रिकॉर्ड होने के कारण सेंटकॉम में इस्लामाबाद की भागीदारी खाड़ी में संचालन को खतरे में डालती है और पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतियों की जानकारी कट्टरपंथी तत्वों को दे सकती है.

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डोनाल्ड ट्रंप को जमीनी हकीकत पर करना चाहिये विचार

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या कोई भी अमेरिकी प्रशासन यह मानता है कि पाकिस्तान में सुधार हुआ है, तो उन्हें हाल की जमीनी हकीकत पर विचार करना चाहिए, क्योंकि दक्षिण एशियाई देश अभी भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों को पनाह दे रहा है, अपने पड़ोस में जिहादियों का निर्यात कर रहा है, तथा वैश्विक उग्रवाद को बढ़ावा देने वाले कट्टरपंथी उपदेशों पर आंखें मूंद लेता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, “अगर अमेरिका फिर से इस चाल में फंसता है, तो इससे न सिर्फ़ पाकिस्तान का हौसला बढ़ेगा, बल्कि उस समय क्षेत्र में अस्थिरता भी आएगी, जब अमेरिका को अपनी साझेदारियों में विश्वसनीयता की जरूरत है. असीम मुनीर की एक महीने में दूसरी वाशिंगटन यात्रा को मज़बूत होती दोस्ती के संकेत के तौर पर नहीं, बल्कि एक चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए. इतिहास खुद को दोहराने वाला है. और जब ऐसा होगा, तो विश्वासघात फिर से पूरा हो जाएगा.”

– भारत एक्सप्रेस



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