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“30 लाख हत्याएं, 3 लाख से ज्यादा महिलाओं के रेप…”, क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश के गुड बुक में हो पाएगा शामिल? विशेषज्ञ बोले- ये असंभव है

Pakistan 1971 War: 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के द्वारा किए गए अत्याचारों को लेकर हाल ही में “वी ओ एन अपोलोजी टू बांग्लादेश” नामक किताब ने फिर से बहस छेड़ दी है.

Pakistan 1971 War

पाकिस्तान को अपनी मौलिक कृति ‘वी ओ एन अपोलोजी टू बांग्लादेश’ को फिर से पढ़ना चाहिए. इस कृति में कई जाने-माने पाकिस्तानियों ने 1971 में पाकिस्तानी सेना की ओर से किए गए अपराधों पर आक्रोश व्यक्त किया है. इसमें बताया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति याह्या खान और सैन्य अधिकारी टिक्का खान के शासन में बांग्लादेश ने कितनी भयानक पीड़ा झेली थी. यह जानकारी मंगलवार को एक रिपोर्ट में दी गई.

मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने 30 लाख बांग्लादेशियों की हत्या की, 2-4 लाख महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया, 1 करोड़ बांग्लादेशियों को भारत में शरण लेने के लिए मजबूर किया और बंगाली गांवों और कस्बों को आग के हवाले कर दिया.

बांग्लादेशी इतिहासकार सैयद बदरुल अहसन ने लिखा है लेख

बांग्लादेशी पत्रकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक सैयद बदरुल अहसन ने एक लेख में लिखा है कि जनरल एएके नियाजी ने अपने अधीन सैनिकों की ओर से बांग्लादेशी महिलाओं के बलात्कार के जरिए लोगों की एक ‘नई नस्ल’ बनाने की खुलेआम बात की थी. यह लेख अवामी लीग की वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ और पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर भी प्रसारित हुआ.

उन्होंने लिखा, “यह एक ऐसी कृति है, जिसे शहबाज शरीफ और उनके मंत्रियों के साथ-साथ फील्ड मार्शल असीम मुनीर को पढ़ने की जरूरत है, ताकि वे याद रख सकें कि उनके देशवासियों ने बांग्लादेश में किस तरह का आतंक फैलाया था, आखिर क्यों पाकिस्तान को किसी भी मायने में बंगाली ‘भाईचारे’ वाला देश नहीं मान सकते.”

1971 के नरसंहार पर माफी की मांग

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में ढाका यात्रा के दौरान दावा किया था कि इस्लामाबाद और ढाका के बीच मौजूद तीन अनसुलझे मुद्दे, जिनमें 1971 के नरसंहार पर माफी की पुरानी मांग भी शामिल है, पहले ही दो बार सुलझाए जा चुके हैं.

रविवार को मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद जब इन अनसुलझे मुद्दों पर चर्चा को लेकर सवाल किया गया तो डार ने जवाब दिया,

यह मुद्दा पहली बार 1974 में सुलझा था. उस समय का दस्तावेज दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक है. इसके बाद जनरल परवेज मुशर्रफ बांग्लादेश आए और इस मुद्दे को सुलझाया. ऐसे में, यह मुद्दा दो बार सुलझ चुका है, एक बार 1974 में और दूसरी बार 2000 के शुरुआती दशक में.

जुल्फिकार अली भुट्टो ने सिर्फ कहा था तौबा

बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जीवनी लिखने वाले अहसन ने लिखा,

क्या जुल्फिकार अली भुट्टो ने जून 1974 में बांग्लादेश की यात्रा के दौरान अपने देश की ओर से माफी मांगी थी? उन्होंने सिर्फ ‘तौबा’ कहा था, मानो 1971 में उनके देश, बल्कि खुद उनके ओर से किए गए पापों को धोने के लिए यही काफी हो. क्या परवेज मुशर्रफ ने कोई माफी मांगी थी? उन्होंने 1971 की दुखद घटनाओं पर खेद व्यक्त किया था. यह माफी मांगने का कोई तरीका नहीं था.

उन्होंने कहा कि हाल ही में बांग्लादेश में कुछ राष्ट्रविरोधी तत्वों को हौसला मिला है, जिन्हें उन दलों का समर्थन प्राप्त है जिनके ‘गुंडा दस्तों’ ने 1971 में पाकिस्तानी सेना की मदद से बांग्लादेशी बंगालियों की हत्या की थी. इन लोगों को उन पाकिस्तानियों की टिप्पणियों से बल मिला है, जो पुराने देश के ‘पुनर्मिलन’ की बात करते हैं.

ये भी पढ़ें- राजस्थान में शाहरुख खान-दीपिका पादुकोण सहित 7 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

1971 के नरसंहार के दौरान पाकिस्तानी सेना की ओर से 30 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि 3,00,000 से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया. इस नरसंहार के बाद से, बांग्लादेश के लोग लगातार पाकिस्तान से अपनी बर्बरता के लिए माफी मांगने की मांग कर रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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