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3 देशों के 144 घंटे के दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे PM मोदी, भारत के लिए उसके क्या मायने हैं? इस एक्सप्लेनर में जानिए

ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम, इंडोनेशिया से बंदरगाह की डील और न्यूजीलैंड से 35 हजार करोड़ का ट्रेड…ये बड़े ऑब्जेक्टिव हैं पीएम मोदी की 6 दिवसीय विदेश यात्रा के. उनकी यह यात्रा द्विपक्षीय दौरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने वैश्विक कूटनीति में भारत की मजबूत होती विश्वसनीयता को दर्शाया है.

PM Modi Foreign Visit Outcomes
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 दिनों में 3 देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) का अपना मैराथन दौरा पूरा कर आज सुबह स्वदेश लौट आए. लगभग 144 घंटे की इस यात्रा को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है. रक्षा निर्यात से लेकर परमाणु ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक बंदरगाहों के विकास तक, इस यात्रा ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को रेखांकित किया है.

दशकों से जिन देशों के दरवाजे भारत के लिए बंद थे या जहां की नीतियां भारत के पक्ष में नहीं थीं, वहां अब प्रधानमंत्री मोदी की दस्तक से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. आइए समझते हैं कि इस त्रिकोणीय दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ है.

1. ऑस्ट्रेलिया: 18 साल बाद यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति

इस यात्रा की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक ऑस्ट्रेलिया से परमाणु रिएक्टरों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति का शुरू होना है. इतिहास पर गौर करें तो जनवरी 2008 में जब भारत का विशेष दूत ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश के लिए पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) पहुंचा था, तो ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करने का हवाला देकर यूरेनियम देने से साफ इनकार कर दिया था.

लेकिन साल 2026 की इस यात्रा ने इतिहास बदल दिया. मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने बिना किसी उपदेश या शर्त के, भारत को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति मानते हुए यूरेनियम आपूर्ति की अंतिम प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर दिया है. यह कदम भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. इसके साथ ही, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द पूरा करने और ऑस्ट्रेलियाई पेंशन फंड को भारतीय बुनियादी ढांचे में निवेश करने पर भी सहमति बनी है.

PM Modi India Australia Relations

2. इंडोनेशिया: रक्षा निर्यात और रणनीतिक पोर्ट का सौदा

जकार्ता में पीएम मोदी की यात्रा ने भारत को एक रक्षा खरीदार से रक्षा विक्रेता (निर्यात करने वाला देश) के रूप में मजबूती से स्थापित किया. भारत और इंडोनेशिया के बीच ‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ और ‘अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली’ की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौते हुए. फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया भारतीय रक्षा तकनीक पर भरोसा जताने वाला तीसरा देश बन गया है.

रणनीतिक रूप से सबसे बड़ा सौदा सबांग बंदरगाह (Sabang Port) के विकास को लेकर हुआ है. मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित यह बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट हब से महज 160 किलोमीटर दूर है. इस समुद्री मार्ग से दुनिया का एक-तिहाई व्यापार होता है, ऐसे में यहां भारत की मौजूदगी चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव को संतुलित करने में बेहद अहम होगी. इसके अलावा, इंडोनेशिया के पास मौजूद दुनिया के 60% निकेल भंडार (महत्वपूर्ण खनिज) के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. इस यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से भी नवाजा.

3. न्यूजीलैंड: 4 दशक का सूखा खत्म, बड़ी साझेदारी

पिछले चार दशकों में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड की यात्रा पर गया. वर्षों से लंबित पड़े व्यापारिक गतिरोधों को दूर करते हुए दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं.

ऑकलैंड में पारंपरिक ‘माओरी पोविरी’ स्वागत के बीच पीएम मोदी ने ‘रणनीतिक साझेदारी और 2030 रोडमैप’ की घोषणा की. इसके तहत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर रक्षा और 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात यह रही कि भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच एक लॉजिस्टिक्स समझौता हुआ है, जिसके तहत अब भारतीय नौसेना के जहाज ऑकलैंड में सहायता और रसद (सप्लाई) प्राप्त कर सकेंगे. यह समझौता दर्शाता है कि भारत की समुद्री ताकत अब हिंद महासागर से निकलकर दक्षिण प्रशांत महासागर तक फैल रही है.

पीएम मोदी की यात्रा के महत्वपूर्ण बिंदु (Key Highlights):

ऐतिहासिक यूरेनियम डील: ऑस्ट्रेलिया ने बिना किसी शर्त (NPT पर हस्ताक्षर के दबाव के बिना) भारत को यूरेनियम की आपूर्ति शुरू की; भारत के 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बल.

सबांग बंदरगाह का विकास: भारत और इंडोनेशिया मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर स्थित सबांग पोर्ट का विकास मिलकर करेंगे, जो रणनीतिक रूप से चीन को घेरने (Counter-China) के लिए बेहद अहम है.

ब्रह्मोस-अस्त्र मिसाइल डील: फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया रक्षा क्षेत्र में भारत का नया रणनीतिक साझेदार बना.

लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट: न्यूजीलैंड के साथ हुए समझौते के बाद अब भारतीय नौसेना के जहाजों को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र (ऑकलैंड) में लॉजिस्टिक्स और रिफ्यूलिंग की सुविधा मिलेगी.

द्विपक्षीय व्यापार और निवेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय व्यापार में 55% की वृद्धि दर्ज की गई; ‘ऑस्ट्रेलियन सुपर’ ने भारत में 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा की. न्यूजीलैंड के साथ 7 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य तय किया गया.

सर्वोच्च नागरिक सम्मान: इंडोनेशिया में पीएम मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक और सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया गया.

सांस्कृतिक कूटनीति: पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के हजार वर्ष पुराने हिंदू धरोहर ‘प्रम्बानन मंदिरों’ के संरक्षण में भारत के सहयोग का संकल्प लिया, जो प्राचीन चोल और कलिंग साम्राज्यों के समुद्री सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करता है.

इस प्रकार, पीएम मोदी की यह 6 दिवसीय यात्रा केवल द्विपक्षीय दौरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने वैश्विक कूटनीति में भारत की मजबूत होती विश्वसनीयता को दर्शाया है. चाहे रक्षा तकनीक बेचना हो, यूरेनियम हासिल करना हो या प्रशांत महासागर तक नौसैनिक पहुंच बनाना – भारत अब वैश्विक नियमों का केवल पालन करने वाला देश नहीं, बल्कि नियम तय करने वाले देशों की कतार में खड़ा दिख रहा है.

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