PoJK protests: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में चल रहा विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलन के 17वें दिन रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोग जुटे. आयोजकों का कहना है कि करीब 50 हजार से ज्यादा लोग रैली में शामिल हुए, जिससे यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है. आवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में लोग महंगाई, आर्थिक संकट, प्रशासनिक ढांचे और राजनीतिक अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं. सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक रोक-टोक के बावजूद आंदोलन लगातार जारी है और पाकिस्तान की राजनीति में भी इस पर बहस तेज हो गई है.
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी
इस आंदोलन में महिलाओं और सोशल मीडिया से जुड़े युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रानीमा शाजमा का एक वीडियो चर्चा में है, जिसमें उन्होंने स्थानीय जनता की मुश्किलों और प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए हैं.
राजनीतिक अधिकारों की मांग
रावलकोट में एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमन खान ने फिर से क्षेत्र को अधिक राजनीतिक अधिकार देने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि कश्मीर से जुड़े फैसले वहां के लोगों की इच्छा और आकांक्षाओं के अनुरूप होने चाहिए. साथ ही उन्होंने चुनावी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए.
जरूरी सामान की सप्लाई पर असर
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान से PoJK जाने वाले रास्तों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में दिखाया गया है कि खाद्य सामग्री और अन्य सामान से भरे ट्रक रुके हुए हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ रही हैं.
सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई
आंदोलन से जुड़े संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में कई सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है. कुछ रिपोर्टों में 128 कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने की बात कही गई है. सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को भी आंदोलन से दूर रहने की चेतावनी दिए जाने के आरोप लगे हैं. संगठनों का कहना है कि विरोध के दौरान कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं. प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
तीसरे सप्ताह में आंदोलन
PoJK का यह आंदोलन अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. हालात सामान्य होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं. दक्षिण एशिया के कई विश्लेषक इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और इसके क्षेत्रीय राजनीति पर असर का आकलन कर रहे हैं. पाकिस्तान की संसद में भी इस पर बहस तेज हो गई है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा प्रदर्शनकारियों की आलोचना किए जाने के बाद उनके बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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