भारत को एक ‘आर्थिक दिग्गज’ बताते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने बुधवार को ज़ोर देकर कहा कि एक सच्चे मल्टी-पोलर ऑर्डर का मतलब है कि कोई भी देश दूसरों पर हावी नहीं हो सकता और सभी भागीदार समान अधिकार प्राप्त करते हैं.
चीन में पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन (SCO Summit) के लिए बीजिंग की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पुतिन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और चीन जैसे शक्तिशाली सदस्यों वाले मंच भी नियंत्रण की चाहत नहीं रखते. उन्होंने कहा, ” मल्टी-पोलर दुनिया में कोई आधिपत्य नहीं है, सभी के समान अधिकार हैं. भारत और चीन जैसे आर्थिक दिग्गजों के सदस्य होने के बावजूद, ब्रिक्स जैसे समूह राजनीति या वैश्विक सुरक्षा पर प्रभुत्व के विचार की बात नहीं करते.”
पुतिन ने चीन के नेतृत्व के साथ अपनी औपचारिक और अनौपचारिक बैठकों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “जबकि यूरोपीय संघ (ईयू) की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं आगे बढ़ रही हैं, खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में. चीन के नेताओं के साथ औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत उपयोगी रही है और इसके सकारात्मक परिणाम रहे हैं.”
पुतिन के बयान ने ट्रंप के दावों को नकारा
ऐसे समय में पुतिन की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है जब अमेरिका और भारत टैरिफ विवाद में उलझे हुए हैं. अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है और इसे भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के निरंतर आयात के लिए दंड बताया है.
पुतिन के ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के बारे में बयानों के विपरीत हैं. ट्रंप ने बार-बार भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ बताकर उसकी निंदा की है और हाल ही में दावा किया है कि अब ठप पड़ी व्यापार वार्ताओं के दौरान भारत ने अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क में कोई कमी करने की प्रस्ताव दिया था. उनका तर्क था कि अमेरिका भारत के साथ बहुत कम व्यापार करता है और भारत का “सबसे बड़ा” ग्राहक है.
-भारत एक्सप्रेस
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