डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के मामले में सीक्रेट सर्विस के 6 एजेंट्स को किया गया सस्पेंड
Trump Assassination Attempt: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान पेंसिल्वेनिया में डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के मामले में सीक्रेट सर्विस के 6 एजेंट्स को सस्पेंड कर दिया गया है. 13 जुलाई 2024 को घटी इस घटना में डोनाल्ड ट्रंप पर कैंपेन के दौरान गोली चलाई गई थी. जिसमें गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी. वहीं स्नाइपर्स ने हमलावर को मार गिराया था. हमलावर की पहचान थॉमस क्रूक्स के रूप में हुई थी.
इस संबंध में सीक्रेट सर्विस के डिप्टी डायरेक्टर ने बयान जारी किया है. डिप्टी डायरेक्टर मैट क्विन ने सीबीएस न्यूज को जानकारी दी है कि क्यों इन 6 एजेंट्स को सस्पेंड किया गया है. उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस के इन एजेंट्स पर पेनल्टी लगाई गई है. जिसके तहत उन्हें 10 दिन से लेकर 42 दिनों के अनपेड लीव पर भेजा गया है.
नहीं बरती जाएगी कोई कोताही
मैट क्विन ने बताया कि लीव से वापस लौटने पर इन एजेंट्स को किसी और कामों में लगाया जाएगा. इस मामले में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी.
सीक्रेट सर्विस की नाकामी से हुआ था हमला
इस घटना के संबंध में दिसंबर में भी एक रिपोर्ट जारी हुई थी. 180 पेजों की इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 13 जुलाई की इस घटना को रोका जा सकता था. लेकिन सीक्रेट सर्विस की नाकामी की वजह से ये सब हुआ.
क्या है सीक्रेट सर्विस
सीक्रेट सर्विस इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति की सुरक्षा करती है, लेकिन हालात हमेशा से ऐसे नहीं थे. दरअसल 1865 के दौरान अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट की एक शाखा के तौर पर सीक्रेट सर्विस को शुरू किया गया था. जिसका काम था डॉलर की जालसाजी को रोकना. लेकिन साल 1901 में तत्कालीन राष्ट्रपति विलियम मैकिनले की न्यूयॉर्क में हत्या कर दी गई. जिसके बाद सीक्रेट सर्विस को फेंक करेंसी को रोकने के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा का भी जिम्मा दे दिया गया.
क्या है सीक्रेट सर्विस की ताकत
सीक्रेट सर्विस के एजेंट बिना वारंट के भी लोगों को गिरफ्तार कर सकते हैं. सीक्रेट सर्विस के पास खुद वारंट इश्यू करने की ताकत होती है. जो अमूमन कोर्ट के पास होती है.
– भारत एक्सप्रेस
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