Bangladesh News: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ढाका की एक अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई मौत की सजा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वर्तमान में भारत में मौजूद हसीना ने इस फैसले को न सिर्फ अलोकतांत्रिक परिणाम बताते हुए इसकी निंदा की है, बल्कि प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं.
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने पिछले वर्ष सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान घातक कार्रवाई के आरोप में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदोज्जमां खान कमाल को मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है.
‘यह फैसला एक ठगी है’
इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शेख हसीना ने इसे एक ‘ठगी’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह एक ‘पूर्व निर्धारित फैसला’ था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने और अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया, और इसे एक गैर-निर्वाचित यूनुस सरकार का अलोकतांत्रिक परिणाम बताया.
ढाका में हिंसा और सन्नाटा
ट्रिब्यूनल के फैसले से पहले राजधानी ढाका में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती के बीच हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने आईं. सामान्य यातायात जाम से जूझने वाली ढाका की सड़कों पर सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा, और कड़ी निगरानी वाले चौराहों से इक्का-दुक्का वाहन ही गुजरते दिखे.
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कुछ वक्त बाद ही शहर में हिंसा भड़क उठी. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध करने के लिए पेड़ों के तने और टायर जलाए, और ढाका के कई इलाकों में कई देसी बम विस्फोट भी हुए. देश के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की हिंसा की खबरें आई हैं.
कैसे आया फैसला?
शेख हसीना की अनुपस्थिति में यह मुकदमा चलाया गया है, और उनके इस तीखे बयान से बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक और न्यायिक स्थिति पर तनाव और बढ़ने की आशंका है. ऐसे में सरकार ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. अब देखना होगा कि आने वाले समय में इसपर हसीना और उनकी पार्टी इस फैसले के खिलाफ क्या कदम उठाती है.
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