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खौल रहा है प्रशांत महासागर! तेजी से पनप रहा ‘सुपर अल नीनो’, अगर एक्टिव हुआ तो बदल जाएगा दुनिया का भूगोल

Super El Nino In Pacific Ocean: अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम प्रक्रिया है. जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. तो उसका मौसम पर बेहद गंभीर असर पड़ता है. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA का कहना है कि 80 प्रतिशत संभावना है कि जुलाई तक अल नीनो बन जाए.

Super El Nino In Pacific Ocean

Super El Nino In Pacific Ocean

Super El Nino In Pacific Ocean: पूरी दुनिया भयंकर गर्मी की चपेट में है. भारत का हाल तो और बुरा है. इस समय दुनिया के 22 सबसे गर्म शहरों में सभी भारत के ही हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक मौसम में अचानक हो रहे इस बदलाव को लेकर दंग हैं. अब समुंदर में कुछ ऐसा हो रहा है जिसने वैज्ञानिकों की चिंता को और बढ़ा दिया है. कहा जा रहा है कि जो इस समय गर्मी पड़ रही है वो तो कुछ भी नहीं है. आने वाले समय में हालात इससे भी बुरे हो सकते हैं.

मौसम वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में कुछ ऐसा देखा है जिसने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के इस सबसे बड़े महासागर में तेजी से ‘सुपर अल नीनो’ बन रहा है. अगर ये पूरी ताकत से विकसित हुआ तो दुनिया भर में इसका प्रभाव देखा जा सकता है. कई देशों के मौसम का संतुलन तक गड़बड़ा सकता है.

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसम प्रक्रिया है. जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. तो उसका मौसम पर बेहद गंभीर असर पड़ता है. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA का कहना है कि 80 प्रतिशत संभावना है कि जुलाई तक अल नीनो बन जाए.

Super El Nino In Pacific Ocean
खौल रहा प्रशांत महासागर (AI IMAGE)

वैज्ञानिकों ने देखा है कि प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. समुद्र के अंदर बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो चुका है. अगर समुद्र का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ता है तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ माना जाएगा. हालांकि ऐसा बहुत कम बार हुआ है. इससे पहले साल 1982, 1997 और 2015 में ही इतने शक्तिशाली अल नीनो देखे गए थे.

हवाएं भी निभाती हैं अहम रोल

प्रशांत महासागर में अल नीनो बनने में हवाएं भी अहम रोल निभाती हैं. यहां पूरब से पश्चिम की तरफ चलने वाली हवाएं अल निनो को प्रभावित करती हैं. अगर ये हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो समुद्र और तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे अल नीनो और मजबूत बन जाता है.

वहीं ये हवाएं अचानक से तेज हो जाएं तो अल नीनो भी कमजोर पड़ जाता है. यहीं वजह है कि वैज्ञानिक अभी पक्के तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

अगर सुपर अल नीनो बना तो क्या होगा?

प्रशांत महासागर में अगर सुपर अल नीनो बनता है तो दुनिया के कई देशों पर इसका असर देखा जा सकता है. कई देशों का मौसम पूरी तरह बदल सकता है.

इससे जहां भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है. तो वहीं ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और अमेजन क्षेत्र में भी सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. इससे दुनिया के औसत तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है.

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खौल रहा समुद्र

अल नीनो की वजह से खौलते समुद्र की गर्मी धीरे-धीरे वातावरण में फैलने लगती है. इससे पूरी दुनिया में तापमान बढ़ने लगता है. जिसका असर कई मौसम पर भी दिखता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार समुद्र पहले से बहुत ज्यादा गर्म है. अगर अल नीनो अपनी पूरी ताकत से विकसित हुआ तो यह विश्व के लिए अच्छा साबित नहीं होगा. इससे कहीं सूखा, तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है.

-भारत एक्सप्रेस



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