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Hormuz Strait Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि ईरान ने नेकदिली दिखाते हुए 10 तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दे दी है. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान यह बात कही. उन्होंने दावा किया कि पहले ईरान सिर्फ 8 जहाजों को छोड़ने पर तैयार था, लेकिन बाद में 10 टैंकर पास कर दिए. ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं.
ईरान का साफ इनकार
वहीं, दूसरी ओर ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने ट्रंप के सभी दावों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया. ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका और उसके समर्थक देशों के लिए पूरी तरह बंद है. कोई भी ऐसा जहाज जो अमेरिका या इजरायल का समर्थन करता हो, इस रास्ते से नहीं गुजर सकता. ईरान ने चेतावनी दी कि किसी भी हिमाकत का कड़ा जवाब दिया जाएगा.

हमले की डेडलाइन बढ़ाई
ट्रंप ने कहा कि ईरान की गुजारिश पर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला १० दिनों के लिए टाल दिया गया है. नई डेडलाइन ६ अप्रैल तक रखी गई है. ट्रंप का कहना है कि ईरान अब बातचीत के लिए गंभीर है और पाकिस्तान के झंडे वाले जहाजों के जरिए भी सहयोग कर रहा है. उन्होंने इसे ईरान का “बड़ा तोहफा” बताया.

होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां से दुनिया का करीब २० प्रतिशत तेल गुजरता है. पिछले कुछ समय से तनाव के कारण यह रास्ता प्रभावी रूप से बंद हो गया है. ईरान इसे नियंत्रित करता है और अमेरिका विरोधी जहाजों को रोक रहा है. इस वजह से वैश्विक तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है.
एक-दूसरे के दावे खारिज
ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान दबाव में है और डील करना चाहता है. वहीं ईरान साफ कह रहा है कि अमेरिका के लिए स्ट्रेट खुलने का कोई सवाल ही नहीं है. ईरान अपनी शर्तों पर ही कोई फैसला लेगा. दोनों देशों के बीच बैक चैनल बातचीत चल रही है, लेकिन सार्वजनिक रूप से दोनों एक-दूसरे के दावों को खारिज कर रहे हैं.
फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के टैंकरों के लिए बंद ही है. कुछ तटस्थ या पाकिस्तान जैसे देशों के जहाज गुजर रहे हैं, लेकिन मुख्य रूप से तनाव बना हुआ है. दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश कोई समझौता कर पाएंगे या स्थिति और बिगड़ेगी.
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