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60 घंटे में कई बार पाकिस्तान पहुंचे तुर्किए के मिलिट्री प्लेन, नूर खान एयरबेस पर क्या है ‘सीक्रेट प्लान’?

Pakistan-Turkey Secret Deal: पाकिस्तान में तीन दिनों के भीतर तुर्किए के सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही देखी गई. जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

Turkish military planes arrive in Pakistan.

पाकिस्तान पहुंचे तुर्किए के मिलिट्री प्लेन

Pakistan-Turkey Secret Deal: पाकिस्तान में पिछले 60 घंटों के दौरान तुर्किए एयरफोर्स के C-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट विमानों की लगातार आवाजाही दर्ज की गई. 19 अगस्त से 21 अगस्त तक इन विमानों ने कई बार तुर्किए और पाकिस्तान के बीच उड़ान भरी. खास बात यह रही कि ये विमान रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस और कराची के मसूर एयरबेस पर आते-जाते देखे गए.

तीन दिनों में आवाजाही सामन्य नहीं

खुफिया सूत्रों का कहना है कि तीन दिनों में हुई यह लगातार आवाजाही सामान्य नहीं थी. यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तुर्किए के सैन्य विमान बार-बार पाकिस्तान क्यों जा रहे थे और वे क्या लेकर पहुंचे?

विमान में क्या था?

इनपुट के मुताबिक संभावना है कि इन विमानों के जरिए पाकिस्तान को बड़ी संख्या में ड्रोन और उनसे जुड़े सिस्टम की सप्लाई की गई हो. साथ ही HQ सीरीज का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की भी चर्चा है. हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि विमानों में वास्तव में कौन सा सैन्य सामान था.

तुर्की पहले से करता रहा है सहयोग

तुर्किए पहले भी पाकिस्तान को ड्रोन और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है. इनमें सबसे चर्चित Bayraktar TB2 ड्रोन है, जो निगरानी और हमले दोनों अभियानों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

पाकिस्तान क्यों बढ़ा रहा ड्रोन क्षमता?

पाकिस्तान अपनी ड्रोन ताकत को तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि पाकिस्तान नए UAV, लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया में है. यह खरीद तुर्किए और सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग के तहत आगे बढ़ाई जा रही है. इसमें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की भूमिका भी बताई जा रही है.

आर्थिक संकट के बावजूद रक्षा सौदे कैसे?

पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रक्षा जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है. मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों के जरिए इन सौदों को आगे बढ़ाया जा रहा है.

एयरबेस पर लैंडिंग अहम क्यों?

नूर खान और मसूर एयरबेस पर बार-बार लैंडिंग इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि ये पाकिस्तान के प्रमुख सैन्य ठिकाने हैं. लगातार उड़ानों ने इस बात पर ध्यान खींचा है कि आखिर इन विमानों के जरिए किस तरह का सैन्य सामान पाकिस्तान पहुंचाया गया.

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फिलहाल खुफिया इनपुट सीधे तौर पर ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई की ओर इशारा करते हैं. यही वजह है कि 19 से 21 अगस्त के बीच तुर्किए के सैन्य विमानों की लगातार मौजूदगी को पाकिस्तान की बढ़ती ड्रोन और एयर डिफेंस क्षमता से जोड़ा जा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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