US Attacks Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए 30 Tomahawk Cruise Missiles दागीं, जिनका निशाना सीधे Natanz और Isfahan स्थित ईरान के संवेदनशील परमाणु ठिकाने थे.
यह मिसाइल हमला अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बियों और जंगी जहाज़ों से अंजाम दिया गया, जो ओमान की खाड़ी और अरब सागर में तैनात थे.
यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश के बाद हुआ जिसमें उन्होंने ईरान की परमाणु गतिविधियों को “वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” बताया था.
हमले के बाद व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई “सर्जिकल स्ट्राइक” थी, जिसका उद्देश्य ईरान के हथियार निर्माण क्षमता को सीमित करना है.
Tomahawk Missile क्या है?
- Tomahawk एक लंबी दूरी की, सब-सोनिक क्रूज़ मिसाइल है जिसे समुद्र या पनडुब्बी से दागा जा सकता है.
- इसकी रेंज लगभग 1,600 किमी तक होती है और यह GPS/INS गाइडेंस सिस्टम के जरिए अत्यंत सटीकता से लक्ष्य को भेदती है.
- यह मिसाइल बेहद कम ऊँचाई पर उड़ान भरती है, जिससे रडार द्वारा पकड़ा जाना मुश्किल होता है.
कई ठिकानों पर हुआ भारी नुकसान-ईरानी मीडिया
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में इस्फहान और नतांज़ के कई संवेदनशील रिएक्टर, यूरेनियम संवर्धन केंद्र और भंडारण इकाइयाँ आंशिक रूप से या पूरी तरह नष्ट कर दी गई हैं.
ईरानी मीडिया ने हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि इन ठिकानों पर भारी नुकसान हुआ है और कई तकनीकी स्टाफ घायल हुए हैं.
ईरान की Atomic Energy Organisation ने हमलों को “अंतरराष्ट्रीय संधियों और NPT (Non-Proliferation Treaty) का गंभीर उल्लंघन” बताया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है.
तेहरान का कहना है कि ये ठिकाने IAEA (International Atomic Energy Agency) की निगरानी में थे, और अमेरिका ने बिना किसी चेतावनी के हमला कर अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ा है.
इजराइल ने अमेरिका की कार्रवाई को बताया “आवश्यक”
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह मिसाइल हमला क्षेत्र में तनाव को और अधिक भड़का सकता है और इसके गंभीर सामरिक और राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं.
इजराइल ने अमेरिका की इस कार्रवाई को “आवश्यक” और “सटीक रणनीति” बताया है, जबकि रूस और चीन ने कड़े शब्दों में निंदा की है.
Tomahawk मिसाइलों का यह हमला एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सहन नहीं करेगा, और यदि ज़रूरत पड़ी तो और भी सख्त सैन्य विकल्प अपनाएगा. यह मध्य पूर्व को एक और बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

