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ईरान की ‘वेपन कुंडली’: US इंटेलिजेंस का खुलासा, सुरक्षित है ‘महाविनाश’ का जखीरा

US Iran Conflict: अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत खत्म नहीं हुई है. US इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के भारी ताकत अब भी सुरक्षित है. जानें ईरान की पूरी ‘वेपन कुंडली’

Intelligence Report On US Iran War

AI Photo

US Iran Conflict: पश्चिम एशिया में हफ्तों तक चले भीषण युद्ध और अमेरिका-इज़रायल की भारी बमबारी ने भले ही ईरान के सैन्य ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन उसकी ताकत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट में सीजफायर की कोशिशों के ठीक बीच, अमेरिकी इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट ने दुनिया को चौंका दिया है.

अमेरिकी इंटेलिजेंस और ग वॉल स्ट्रीट जनरल की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास आज भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और एक विशाल सेना मौजूद है, जो किसी भी वक्त युद्ध का रुख पलटने का माद्दा रखती है.

ईरान का मिसाइल भंडार (US Iran War)

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास करीब 2500 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें थीं. अमेरिकी और इज़रायली अधिकारियों का अनुमान है कि भीषण हवाई हमलों के बावजूद ईरान के पास 70 फीसदी मिसाइल भंडार अब भी सुरक्षित है (करीब 1,000 से अधिक मिसाइलें).

ईरान के इस घातक जखीरे में ‘सेज्जिल’, ‘गद्र’ और ‘खोर्रमशहर’ जैसी बेहद खतरनाक मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता 2000 किलोमीटर तक है. यदि शांति वार्ता विफल होती है, तो ईरान इन मिसाइलों का उपयोग फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में अमेरिकी बलों और जहाजों को निशाना बनाने के लिए कर सकता है.

सुरंगों का ‘अभेद्य’ चक्रव्यूह

अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान के सीक्रेट अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स (Underground Bunkers) साबित हुए हैं. ये बेस पहाड़ों के बहुत गहरे हिस्से में बनाए गए हैं, जिन्हें हवाई हमलों से पूरी तरह नष्ट करना लगभग नामुमकिन है.

आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के 335 से अधिक मिसाइल लॉन्चर (कुल क्षमता का 60-70 फीसदी) निष्क्रिय जरूर हुए हैं. अमेरिकी वायुसेना ने सुरंगों के निकास द्वारों को ब्लॉक कर दिया है. लेकिन, इंटेलिजेंस रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इनमें से ज्यादातर लॉन्चर आसानी से ‘रिपेयर’ (ठीक) किए जा सकते हैं और उन्हें वापस सतह पर लाया जा सकता है.

सैनिकों की विशाल फौज एक्टिव (US Iran War Report)

मिसाइलों के अलावा, ईरान के पास ‘शाहेद-136’, ‘मोहजेर’ और ‘अबबिल’ जैसे घातक ड्रोन की फौज है. हालांकि हमलों के कारण इनकी संख्या आधी से भी कम रह गई है, लेकिन ईरान रूस जैसे देशों की मदद से इन्हें फिर से तेजी से हासिल कर सकता है. इसके अलावा, ईरान की थल सेना, नौसेना, वायु सेना और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) में अभी भी 534,000 सैनिक पूरी तरह सक्रिय (Active) हैं.

पेंटागन में दो फाड़

ईरान की ताकत को लेकर वाशिंगटन में विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का दावा है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम ‘कार्यात्मक रूप से नष्ट’ (Functionally Destroyed) हो चुका है. अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन के अनुसार, ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर 13,000 से अधिक म्यूनिशंस (गोले-बम) गिराए गए हैं और व्हाइट हाउस का मानना है कि उसने अपने सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं.

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लेकिन, दूसरी तरफ पूर्व सीआईए (CIA) एनालिस्ट केनेथ पोलक और खुफिया रिपोर्टें इस बात की ताकीद करती हैं कि ईरान क्षेत्रीय सेनाओं की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली है और बहुत तेजी से अपनी खोई हुई ताकत वापस पाने (Rebuild) में सक्षम है.

ईरान की ‘रिकवरी’ तेज (Intelligence Report On US Iran War)

अमेरिकी अधिकारी भले ही यह मान रहे हों कि ईरान फिलहाल बड़े पैमाने पर नई मिसाइलों का निर्माण नहीं कर सकता, लेकिन रूस या चीन जैसे देशों के बाहरी समर्थन से उसकी ‘रिकवरी’ की गति तेज हो सकती है. इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता अब सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि यह तय करेगी कि ईरान अपने बचे हुए हथियारों के जखीरे को ‘शांति’ के लिए बक्से में बंद करेगा या फिर खाड़ी की स्थिरता को एक बार फिर दांव पर लगाएगा.



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