US Israel Iran conflict: पिछले महीने अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस युद्ध का असर अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. महज कुछ ही हफ्तों में हालात ऐसे हो गए हैं कि देश का कुल कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. बुधवार तक यह आंकड़ा 39 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया.
ट्रंप प्रशासन की चुनौतियां
राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार टैक्स सुधार, रक्षा खर्च और इमिग्रेशन पर सख्ती जैसे कदम उठा रही है. चुनावी वादों में उन्होंने कर्ज घटाने की बात कही थी, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका का कर्ज भारत की पूरी अर्थव्यवस्था से लगभग दस गुना ज्यादा हो चुका है.
लगातार बढ़ता कर्ज
गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरें, महंगे सामान और सेवाएं, तथा कम वेतन जैसी वजहों से हालात बिगड़े हैं. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लगातार कर्ज लेना और उस पर ब्याज चुकाना लंबे समय में देश के लिए नुकसानदेह साबित होगा.
पीटरसन फाउंडेशन की चेतावनी
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के चेयरमैन माइकल पीटरसन ने कहा कि जिस तेजी से कर्ज बढ़ रहा है, वह आने वाली पीढ़ियों पर भारी बोझ बनेगा. उनका कहना है कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही सरकारों के दौरान संघीय कर्ज में इजाफा हुआ है.
कुछ महीनों में बढ़ा एक ट्रिलियन डॉलर
पिछले पांच महीनों में अमेरिका का कर्ज 38 ट्रिलियन से बढ़कर 39 ट्रिलियन डॉलर हो गया. दो महीने पहले यह 37 ट्रिलियन था. पीटरसन का अनुमान है कि चुनावों से पहले ही यह आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.
ईरान युद्ध में भारी खर्च
व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने बताया कि ईरान युद्ध में अब तक 12 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका है. यह भी साफ नहीं है कि यह संघर्ष कब खत्म होगा.
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घाटे के आंकड़े
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में सरकार का खर्च 7.01 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि राजस्व केवल 5.23 ट्रिलियन डॉलर था. यानी 1.78 ट्रिलियन डॉलर का घाटा हुआ. हालांकि यह पिछले साल से 41 बिलियन डॉलर कम है, लेकिन कुल कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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