US Iran War 2026 Timeline: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) का पूरा इलाका एक अभूतपूर्व और विनाशकारी महायुद्ध की आग में झुलस रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुरानी कूटनीतिक दुश्मनी अब सीधे सैन्य टकराव में बदल चुकी है, जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है. यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर वर्चस्व कायम करने की एक महा-जंग है.
अमेरिका Vs ईरान जंग की टाइमलाइन
तनाव और बारूद के इस ढेर के बीच, कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी खबर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, होर्मुज में भड़की ताज़ा हिंसा को शांत करने और दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने से वापस लाने के लिए 30 जून 2026, दिन मंगलवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक आपातकालीन बैठक होने जा रही है. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं इस साल फरवरी में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद से शुरू हुई अमेरिका-ईरान जंग की वो पूरी भयावह टाइमलाइन क्या है?
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फरवरी 2026: 900 हवाई हमले और खामेनेई की मौत (US Iran War Khamenei Death Airstrikes)
अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए करीब 900 विनाशकारी हवाई हमले (Airstrikes) किए. इन भीषण हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में कोहराम मच गया. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार को ठप करने के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की पूर्ण सैन्य नाकाबंदी कर दी.
अप्रैल 2026: दो हफ्ते का संघर्ष विराम और शांति (US Iran War Ceasefire April)
दुनिया भर में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और कूटनीतिक दबाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक अप्रत्याशित युद्ध विराम (Ceasefire) हुआ. दोनों देश शुरुआती तौर पर दो हफ्ते के लिए संघर्ष विराम पर सहमत हुए. इस दौरान ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने पर राजी हो गया था.
जून 2026: कार्गो शिप पर हमला और दोबारा तनाव (US Iran War In June)
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में शांति ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी और जून महीने में यह रणनीतिक जलमार्ग फिर से सुलग उठा. एक अंतरराष्ट्रीय कार्गो जहाज पर हुए घातक हमले के बाद अमेरिका का गुस्सा भड़क गया. वाशिंगटन ने सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर लगातार दो दिनों तक भीषण बमबारी की.
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महा-संकट पर निर्णायक महा-बैठक
लगातार बढ़ते हमलों के बीच खाड़ी संकट को पूर्ण युद्ध में बदलने से रोकने के लिए 30 जून मंगलवार को दोनों पक्षों और वैश्विक मध्यस्थों के बीच एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है. पूरी दुनिया की नजरें इस महा-बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि यहीं से तय होगा कि मिडिल ईस्ट शांति की ओर बढ़ेगा या विनाशकारी महायुद्ध की ओर.
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