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क्यों सुलग रहा है बलूचिस्तान? जिन्ना के ‘धोखे’ से शुरू हुआ वो संघर्ष, जिसका इतिहास सालों पुराना है, पढ़ें- EXPLAINER

Balochistan Pakistan Conflict EXPLAINER: बलूचिस्तान ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. यहां भारी मात्रा में गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं. इस वजह से बलूचिस्तान चीन की नजरों में है. बलूचों को चीन का इस इलाके में घुसना पसंद नहीं आ रहा है.

Balochistan Pakistan Conflict EXPLAINER

Balochistan Pakistan Conflict EXPLAINER: इन दिनों पाकिस्तान के अंदर के हालात दिन पर दिन बेकाबू होते जा रहे हैं. सालों तक जिस आतंक को पाकिस्तान पोषित करता रहा, अब वह अपनी उसी जाल में फंस गया है. हर बीतते दिन के साथ पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. आए दिन पाकिस्तानी सेना पर बलूचों के हमलों से पाकिस्तान डंवाडोल है.

बलूचिस्तान ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. बलूचिस्तान दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान में आता है. यहां भारी मात्रा में गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं. इस वजह से बलूचिस्तान चीन की नजरों में है. चीन इन क्षेत्रों में काफी निवेश कर रहा है.

बलूचिस्तान से होकर गुजरता है चीन का सीपेक

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमी कॉरिडोर (सीपीईसी) इधर से ही गुजरता है. इस गलियारे में चीन ने अरबों का निवेश किया है. चीन बलूचिस्तान में खनन परियोजनाओं और ग्वादर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में भी निवेश कर रहा है.

कई चरमपंथी संगठन हैं सक्रिय

इन सबके बीच यहां पर चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं, जिन्हें चीन का इस इलाके में घुसना पसंद नहीं आ रहा है. बीएलए और बीएलएफ बलूचिस्तान में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं. हाल में बलूच और पाकिस्तानी सेना के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिली. एक तरफ बीएलए और दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान भी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठा हुआ है.

क्यों बलूचिस्तान में तनाव?

सवाल ये उठता है कि आखिर बलूचिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव क्यों चल रहा है. बता दें, आज का बलूचिस्तान ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़ा है. कभी अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार बलूचिस्तान का हिस्सा थे.

स्वतंत्र रियासत था बलूचिस्तान

पाकिस्तान से जुड़ने से पहले बलूचिस्तान एक स्वतंत्र रियासत था. हालांकि, बाद में मोहम्मद अली जिन्ना के धोखे से उसे पाकिस्तान में शामिल होना पड़ा. पूर्व में बलूच समेत अन्य रियासतों को पाकिस्तान में मिलाने की शर्त ये थी कि सरकार उनके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी.

बलूचिस्तान नहीं चाहते थे जिन्ना

बलूच का विलय पाकिस्तान में हुआ जरूर था, लेकिन वह कभी भी इस चीज के लिए राजी नहीं था. पाकिस्तान जब अस्तित्व में आया, तब जिन्ना भी ये नहीं चाहते थे कि बलूच का विलय पाक में हो. लेकिन धीरे-धीरे तस्वीरें बदलती गईं और देखते ही देखते बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया गया.

बलूचिस्तान के नेता भारत में होना चाहते थे शामिल

इतिहासकारों का भी यही मानना है कि बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान के साथ आने के लिए सहमति नहीं दे रहा था. बलूचिस्तान के नेता भारत में अपना विलय करने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें पाकिस्तान में शामिल नहीं होना था.

पाकिस्तानी सरकार की दखलअंदाजी की मनाही

पाकिस्तानी सरकार की दखल अंदाजी की मनाही की शर्तों के साथ देसी रियासतों को पाकिस्तान में जबरन विलय कर लिया. फिर 1956 में पाकिस्तान ने संविधान लागू किया, जिसके बाद इन क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना और नौकरशाहों का नियंत्रण बढ़ने लगा.

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पाकिस्तान में विलय के साथ चरमपंथी संगठनों का हुआ उदय

बलूच के पाकिस्तान में विलय के साथ ही चरमपंथी संगठनों का उदय भी हो गया. साल 2000 तक बीएलए की तरफ से बलूचिस्तान में सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जाने लगा.

बलूचिस्तान आज भी खुद को एक आजाद मुल्क मानता है. आज तक बलूचिस्तान पाकिस्तान में अपने विलय को स्वीकार नहीं कर रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार के साथ बलूचिस्तान का संघर्ष लगातार जारी है. बलूच का विद्रोह उसी दिन से शुरू हो गया, जिस दिन उसे जबरदस्ती पाकिस्तान में मिला लिया गया.

-भारत एक्सप्रेस



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