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जंग चाहते हैं या शांति..! UNSC में ईरान के साथ क्यों खड़े नहीं हुए चीन और रूस? वोटिंग से हटे पीछे

Middle East Crisis: महायुद्ध को रोकने के लिए UNSC में हुई वोटिंग से चीन और रूस ने अचानक खुद को अलग कर लिया. वीटो पावर होने के बावजूद दोनों महाशक्तियों का यह फैसला क्या ईरान को बचाने का मास्टरप्लान है या अरब देशों के साथ कोई सीक्रेट डील?

China Russia In UNSC On Middle East Conflict

AI Generated Photo

Middle East Crisis: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे महायुद्ध के 13वें दिन दुनिया की निगाहें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) पर टिक गईं. खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर आदि) पर ईरान के हमलों को रोकने के लिए बहरीन की अगुवाई में एक अहम प्रस्ताव लाया गया. 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में 13 देशों ने इसके पक्ष में वोट किया, लेकिन दुनिया के दो सबसे ताकतवर देशों रूस और चीन ने वोटिंग से खुद को अलग कर लिया. इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

प्रस्ताव में क्या था और चीन-रूस ने क्यों बनाई दूरी?

इस प्रस्ताव में मांग की गई थी कि ईरान तुरंत खाड़ी देशों और जॉर्डन पर अपने सैन्य हमले बंद करे, क्योंकि इससे वैश्विक स्थिरता को खतरा है. लेकिन रूस और चीन के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को ‘बेहद असंतुलित’ करार दिया. उनका तर्क था कि इस प्रस्ताव में उन इजरायली और अमेरिकी हमलों का कोई जिक्र नहीं है, जिनसे इस युद्ध की असल शुरुआत हुई और जिसमें ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जान गई. चीन ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव में संघर्ष के ‘मूल कारणों’ को पूरी तरह नजरअंदाज कर पश्चिमी देशों का एजेंडा थोपा जा रहा है.

वीटो का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?

रूस और चीन चाहते तो वीटो पावर का इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव को खारिज कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके पीछे एक बड़ी कूटनीतिक रणनीति थी. दरअसल, यह प्रस्ताव मुख्य रूप से अरब देशों की सुरक्षा से जुड़ा था. रूस और चीन के इन खाड़ी देशों के साथ मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंध हैं. अगर वे वीटो करते, तो अरब देशों के खिलाफ खड़े नजर आते.

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महायुद्ध के 13वें दिन UNSC में हुई इस वोटिंग ने दुनिया के ध्रुवीकरण को पूरी तरह से उजागर कर दिया है. रूस और चीन ने वोटिंग से दूरी बनाकर न केवल ईरान का कूटनीतिक बचाव किया, बल्कि अरब देशों से अपने रिश्ते भी सुरक्षित रखे. लेकिन इस कूटनीतिक दांव-पेच के बीच युद्ध रोकने का कोई ठोस समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा है.



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