चीन की राजधानी बीजिंग में सैन्य परेड चल रही थी. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अपने रूसी और उत्तर कोरियाई समकक्ष व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन के साथ चीन के ऐतिहासिक तियानमेन स्क्वायर से गुजर रहे थे. तभी उन्हें एक ऐसे मुद्दे पर बात करते सुना गया, जिसको लेकर पूरी मीडिया यहां तक की वैज्ञानिक भी इसपर चर्चा कर रहे हैं. ये बात है लंबा जीवन जीने के उपाय के बारे में.
जिनपिंग और पुतिन इस दौरान जीवन को लंबा करने के उपाय के रूप में अंग प्रत्यारोपण पर चर्चा कर रहे थे. उनकी यह ऑडियो अब पूरी दुनिया में वायरल हो रही है.
हॉट माइक में कैद हुई बातचीत
हॉट माइक में कैद ऑडियो के अनुसार, पुतिन ने जिनपिंग को सुझाव देते हुए कहा कि, बायो टेक्नोलॉजी में नए खोज से मनुष्य अमर जीवन को भी प्राक्त कर सकता है. इस बातचीत के दौरान इन दोनों नेताओं के साथ उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन भी चल रहे थे. ये सभी चीन के ऐतिहासिक तियानमेन स्क्वायर से गुजर रहे थे.
बता दें, शी जिनपिंग और पुतिन 13 और 25 सालों से सत्ता में बने हुए हैं और अभी तक दोनों ने पद छोड़ने का कोई इरादा नहीं जताया है.
70 साल पहले…
शी जिनपिंग ने कहा कि, पहले किसी मनुष्य का 70 साल जीना भी दुर्लभ था, लेकिन आजकल 70 साल का व्यक्ति भी बच्चा ही है.
तब पुतिन ने कहा कि, बॉयो टेक्नोलॉजी के विकास के साथ मानव अंगों को निरंतर प्रत्यारोपण कर लोग हमेशा के लिए जीवित रह सकते हैं. यहां तक की अमर भी हो सकते हैं.
पुतिन का जवाब देते हुए जिनपिंग कहते हैं कि चीन में भविष्यवाणियां हैं कि इस सदी में इंसान 150 सालों तक जी सकते हैं.
दुनिया में हो रही चर्चा
जिनपिंग और पुतिन की ये ऑडियो क्लिप अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है. मीडिया से लेकर वैज्ञानिक तक इसपर चर्चा कर रहे हैं. आप भी सोच रहे होंगे कि क्या ऐसा मुमकिन है. तो इसका जवाब है हां बिल्कुल मुमकिन है. जीन थेरेपी से लेकर सेल्युलर रीप्रोग्रामिंग तक रिवर्स एजिंग में बहुत ही कारगर माने जाते हैं.
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क्या है जीन थेरेपी?
उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. जैसे-जैसे इंसान बूढ़ा होता है, उसके शरीर के कामकाज धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं. बुढ़ापे से बचने के लिए वैज्ञानिक जीन थेरेपी पर रिसर्च कर रहे हैं. इसमें वैज्ञानिक खराब जीन को सही करते हैं या कोशिकाओं में नया DNA डाल देते हैं. ताकि बीमारियों को रोका जा सके या उसे ठीक किया जा सके.
वैज्ञानिक एंटी एजिंग से बचने के लिए जीन एडिटिंग थेरेपी का भी इस्तेमाल करते हैं. इसमें DNA के खराब हिस्से को सीधे काटकर हटा देते हैं या उसे बदल देते हैं.
– भारत एक्सप्रेस
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