Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

सीएम Yogi Adityanath का बड़ा बयान- बांग्लादेश वाली गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए, बंटेंगे तो कटेंगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में जन्माष्टमी के अवसर पर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर बोल रहे थे.

Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो- IANS)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बांग्लादेश से सबक सीखिए, एक रहना है, बंटना नहीं है. बंटेंगे तो कटेंगे और एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे. मुख्यमंत्री योगी सोमवार को आगरा में जन्माष्टमी के अवसर पर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर बोल रहे थे.

इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं है. राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हम एक होंगे. बांग्लादेश में देख रहे हैं न, वो गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए. बंटेंगे तो कटेंगे. एक रहेंगे-नेक रहेंगे. सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा तक पहुंचेंगे.

बांटने वाली ताकतों से सावधान

उन्होंने कहा कि समाज, जाति, भाषा के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा. दुर्गादास राठौर का यही संकल्प था. आगरा के कण-कण में कन्हैया का वास है. यहां कला है, आस्था है, समर्पण है, विश्वास है. ये ही राष्ट्र निष्ठा बढ़ाती है.


ये भी पढ़ें: मायावती ने राजनीति से संन्यास लेने की अफवाहों का किया खंडन, कहा- आखिरी सांस तक सक्रिय रहूंगी


मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गादास राठौर का यही संकल्प था. सबसे बड़ी सत्ता के सामने जमींदारों के लिए घुटने टेक दिए थे. उनका कोई नाम लेने वाला नहीं है. दुर्गादास का नाम मारवाड़, एमपी में अमर है. हमें महापुरुषों का नाम याद रखना होगा. 10 साल से मूर्ति मेरा इंतजार कर रही थी. जिस दिन कृष्ण आए, उस दिन लोकार्पण हुआ.

काकोरी ट्रेन एक्शन

उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि देश की आजादी के लिए 9 अगस्त 1925 में लखनऊ में राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना को अंजाम देकर अंग्रेजी हुकुमत को चुनौती दी थी. उस समय अंग्रेजी हुकूमत हिल गई थी. ट्रेन एक्शन में इन क्रांतिकारियों को महज 4 हजार 600 रुपये मिले थे. लेकिन, उन्हें गिरफ्तार कर सजा दिलाने के लिए अंग्रेजों ने 10 लाख रुपये खर्च कर दिए.

उन्होंने कहा कि तब भी आजादी की लड़ाई कमजोर नहीं पड़ी. रामप्रसाद बिस्मिल को जब फांसी दी जा रही थी, तब उनसे पूछा गया कि अंतिम अभिलाषा हो तो बताइए. तब बिस्मिल जी ने कहा- इस भारतवर्ष में सौ बार मेरा जन्म हो और मौत का कारण सदा ही देश उपकार कर्म हो. बार-बार इस हिंदुस्तान की धरती पर जन्म लूं.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

Latest