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भारत के इस राज्य के लोगों को नहीं देना पड़ता है टैक्स, जानिए क्या है वजह

भारतीय आयकर अधिनियम की धारा 10 (26AAA) के तहत एक विशेष प्रावधान की बदौलत, सिक्किम को भारत में विलय के बाद से इनकम टैक्स भरने से छूट मिली हुई है.

प्रतिकात्मक तस्वीर.

Budget 2025: टैक्स का नाम सुनते ही लोग घबरानेे से लगते हैं. सैलरी से कितना बचेगा कितना कटेगा ये सब चिंताएं सामने आ खड़ी होती है. ऐसे में जब भारत के बाकी हिस्से आयकर रिटर्न (ITR) भरने की 31 जुलाई की डेडलाइन को पूरा करने के लिए संघर्ष करते रहते हैं, तब एक राज्य टैक्स की चिंता और डेडलाइन की धरपकड़ से आजाद है. हम बात कर रहे हैं उत्तर पूर्व में प्रकृति की खूबसूरती से लैस सिक्किम राज्य की. हालांकि, सिक्किम (Sikkim) पहले भारत देश का हिस्सा नहीं था. अप्रैल 1975 में सिक्किम अधिकारिक रूप से भारत संघ का हिस्सा बना.

भारतीय आयकर अधिनियम की धारा 10 (26AAA) के तहत एक विशेष प्रावधान की बदौलत, सिक्किम को भारत में विलय के बाद से इनकम टैक्स भरने से छूट मिली हुई है. यह छूट राज्य की मौजूदा टैक्स सिस्टम को बनाए रखने के लिए दी गई थी, जो भारतीय संघ में शामिल होने से पहले लागू थी.

भारत में शामिल होने से पहले सिक्किम के पास अपना टैक्स सिस्टम (Sikkim Tax System) था और इसके निवासी भारतीय आयकर अधिनियम के अधीन नहीं थे. यथास्थिति बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने सिक्किम को आयकर (Income) से विशेष छूट दी.

सिक्किम आयकर छूट अधिनियम

2008 के केंद्रीय बजट ने ‘सिक्किम कर अधिनियम’ को निरस्त कर दिया और आयकर अधिनियम की धारा 10 (26AAA) के माध्यम से सिक्किम के निवासियों को इनकम टैक्स भरने से छूट दी. यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371 (F) के तहत सिक्किम की विशेष स्थिति को बनाए रखने के लिए उठाया गया था.

कानूनी चुनौतियां

2013 में सिक्किम के पुराने निवासियों के संघ और अन्य ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(26AAA) की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उन्होंने तर्क दिया कि इस धारा के तहत “सिक्किमी” की परिभाषा ने अनुचित रूप से दो श्रेणियों के व्यक्तियों को कर छूट से बाहर रखा है:

– 26 अप्रैल, 1975 को भारत में विलय से पहले सिक्किम में बसे भारतीय.

– 1 अप्रैल, 2008 के बाद गैर-सिक्किमी पुरुषों से विवाह करने वाली सिक्किमी महिलाएं.

वित्त अधिनियम 2008 (कर वर्ष 1989-90 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी) द्वारा शुरू की गई धारा 10 (26AAA) के अनुसार, “सिक्किमी” शब्द में शामिल हैं:

-26 अप्रैल, 1975 से पहले सिक्किम विषय रजिस्टर में सूचीबद्ध व्यक्ति.

-1990 और 1991 में सरकारी आदेशों द्वारा रजिस्टर में जोड़े गए व्यक्ति.

-वे व्यक्ति जिनके करीबी रिश्तेदार (पिता, पति, दादा या भाई) रजिस्टर में सूचीबद्ध हैं.

इस परिभाषा में सिक्किम की अधिकांश आबादी शामिल थी, लेकिन लगभग 1 प्रतिशत भारतीय शामिल नहीं थे – जो 26 अप्रैल, 1975 से पहले सिक्किम में बस गए थे और अपनी भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ना चाहते थे, इसलिए उनके नाम सिक्किम सब्जेक्ट्स रजिस्टर में नहीं थे.

तब करदाताओं ने तर्क दिया कि यह बहिष्कार अनुचित और भेदभावपूर्ण था. वे चाहते थे कि कर छूट में 1 अप्रैल, 1975 से पहले सिक्किम में बसे सभी व्यक्ति शामिल हों, जिनके नाम रजिस्टर में नहीं थे. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 1 अप्रैल, 2008 के बाद गैर-सिक्किमी पुरुषों से शादी करने वाली सिक्किमी महिलाओं को छूट देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण था

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने फैसला सुनाया कि 1 अप्रैल, 2008 के बाद गैर-सिक्किमी पुरुषों से शादी करने वाली सिक्किमी महिलाओं को कर छूट देने से इनकार करना वास्तव में भेदभावपूर्ण था. यह नियम उन सिक्किमी पुरुषों पर लागू नहीं होता जिन्होंने गैर-सिक्किमी महिलाओं से शादी की या उन सिक्किमी महिलाओं पर लागू नहीं होता जिन्होंने इस तिथि से पहले गैर-सिक्किमी पुरुषों से शादी की. न्यायालय ने इस नियम को अनुचित तथा समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन पाया.

26 अप्रैल, 1975 से पहले सिक्किम में बसे उन भारतीयों के लिए, जिनके नाम सिक्किम सब्जेक्ट्स रजिस्टर में नहीं हैं, न्यायाधीशों ने इस बात पर सहमति जताई कि छूट न देना भेदभावपूर्ण है, लेकिन उन्होंने अलग समाधान सुझाए. जस्टिस एमआर शाह ने छूट न देने वाले नियम को खारिज कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करके केंद्र को इन व्यक्तियों को कर छूट देने के लिए धारा 10(26AAA) में एक सेक्शन जोड़ने का निर्देश दिया. उन्होंने आदेश दिया कि जब तक कानून में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक इन व्यक्तियों को धारा 10(26AAA) के तहत कर छूट मिलनी चाहिए.


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-भारत एक्सप्रेस



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